इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच पूरी
इंदौर के प्रसिद्ध भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति से जुड़ा मामला अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। जांच आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में प्रस्तुत कर दी है, लेकिन अभी इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग उठी, परंतु सरकार और याचिकाकर्ता पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
दूषित पानी से हुई 36 मौतों के बाद देशभर में चर्चा
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 36 लोगों की जान चली गई। इस त्रासदी ने पूरे देश में जल सुरक्षा और स्वच्छता के मुद्दे को उजागर किया। अब जब जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल हो चुकी है, तो सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस पानी की सप्लाई के लिए जिम्मेदार कौन था और रिपोर्ट में क्या खुलासे हुए हैं। यह मामला जल संसाधनों और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन चुका है।
जांच आयोग का गठन और रिपोर्ट का संक्षिप्त विवरण
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस गंभीर मामले की जांच के लिए 27 जनवरी 2026 को रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था। इस आयोग को भागीरथपुरा में दूषित पानी की आपूर्ति के कारणों का पता लगाने, जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों की भूमिका का विश्लेषण करने, प्रभावित परिवारों को राहत और मुआवजा देने सहित सभी पहलुओं की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे।
आयोग ने नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों से आवश्यक दस्तावेज जुटाए। प्रभावित लोगों के बयान भी दर्ज किए गए। इन सबके आधार पर सैकड़ों पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट में पेश की गई। हालांकि, इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग पर सरकार ने आपत्ति जताई है।
मंगलवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की, परंतु सरकार ने इसका विरोध किया। अधिवक्ता अजय बगड़िया ने कहा कि रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से विभिन्न पक्ष अपनी-अपनी व्याख्या कर सकते हैं, जो मामले की सच्चाई को प्रभावित कर सकता है। अंत में, हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, और फिलहाल रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकले हैं, यह अभी गोपनीय है। जांच के दौरान यह भी पता चला कि सरकारी अस्पतालों में भी वही बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो भागीरथपुरा के दूषित पानी में मिले थे। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि इन अस्पतालों में पानी की गुणवत्ता को लेकर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे आम जनता निजी अस्पतालों और पैकेज्ड पानी पर निर्भर हो रही है।
यह पूरा मामला इंदौर की जल व्यवस्था और निगरानी तंत्र की खामियों को उजागर करता है। 36 मौतों के बाद से ही शहर की पेयजल व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह है कि हाईकोर्ट का अगला फैसला इस मामले में क्या दिशा तय करता है और कब तक यह रिपोर्ट जनता के सामने आएगी।











