गुना में आजीविका मिशन का बड़ा घोटाला उजागर
मध्य प्रदेश के गुना जिले में आजीविका मिशन के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। इस घोटाले में मुख्य आरोपी के रूप में DPM सोनू सुशीला यादव पर गंभीर आरोप लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 3.74 करोड़ रुपये की इस धोखाधड़ी में महिला अधिकारी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और ग्रामीण आजीविका मिशन के सीईओ को पत्र भी लिखा है। हालांकि, महिला अधिकारी के हाईप्रोफाइल राजनीतिक कनेक्शन के कारण अभी तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।
आरोपों की जांच और सरकारी खाता गबन का खुलासा
जांच में पता चला है कि गुना जिले के जिला आजीविका मिशन कार्यालय ने पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में अवैध खाता नंबर 18600010028097 संचालित किया था। इस खाते में सरकारी धन का गबन किया गया, और घोटाले की शुरुआत तब हुई जब सूक्ष्म वित्त विभाग के सेवाराम कुशवाह ने दिसंबर 2025 में शिकायत दर्ज कराई।
उन्होंने बताया कि नेशनल MIS के FDM पोर्टल पर मिली जानकारी के अनुसार, 90.25 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई थी, लेकिन बैंक पासबुक से मिलान करने पर पता चला कि यह राशि कभी भी मिशन के बैंक खाते में आई ही नहीं। इसके बजाय, इस रकम को अवैध खाते में ट्रांसफर कर दिया गया था।
महिला अधिकारी की भूमिका और घोटाले की जड़ें
जांच में यह भी सामने आया कि DPM सोनू सुशीला यादव की भूमिका संदिग्ध रही है। जब इस घोटाले से संबंधित फाइलें और नोटशीट मांगी गईं, तो उन्होंने दावा किया कि ये दस्तावेज कार्यालय से गुम हो गए हैं। बावजूद इसके, उन्होंने थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई।
कलेक्टर ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से DPM के घोटालों की कोई जानकारी नहीं मिली है, जबकि हर साल खातों का ऑडिट भी होता रहा है। यह लापरवाही और संदिग्ध निष्ठा का स्पष्ट संकेत है, जो सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।









