आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह में संस्कृत पाठ को लेकर विवाद
हाल ही में आयोजित आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में संस्कृत श्लोकों के पाठ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनते हुए राजनीतिक और शैक्षणिक जगत दोनों में ही तीव्र प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। इस समारोह में पढ़े गए संस्कृत श्लोकों का विषय और उनके संदर्भ को लेकर अलग-अलग राय सामने आई हैं।
शमा मोहम्मद की आपत्ति और उनके तर्क
कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने इस समारोह में गायत्री मंत्र के बजने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि क्या किसी शैक्षणिक कार्यक्रम में धार्मिक मंत्र का पाठ किया जाना उचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से गायत्री मंत्र से कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि उनके घर में भी यह मंत्र रोजाना बजता है। उनका कहना था कि उनका मुख्य सवाल यह है कि क्या इस तरह के धार्मिक पाठ को सार्वजनिक शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल करना चाहिए। उनका तर्क था कि शैक्षणिक संस्थान सभी धर्मों के धार्मिक नारों और मंत्रों से मुक्त होने चाहिए।
सही जानकारी और पाठ का वास्तविक स्वरूप
हालांकि, आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र ज्ञान सी. मेहता ने शमा मोहम्मद के दावे को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि समारोह में जो संस्कृत श्लोक पढ़ा गया, वह गायत्री मंत्र नहीं था। मेहता ने स्पष्ट किया कि उस पाठ का संबंध तैत्तिरीय उपनिषद से है, जो शिक्षा और गुरु-शिष्य के संबंध को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पाठ में ‘तन्मामवतु, तद्वक्तारमवतु’ जैसी प्रार्थना शामिल थी, जिसका अर्थ है कि विद्यार्थी और शिक्षक दोनों की रक्षा हो। इस तरह, यह स्पष्ट हो गया कि समारोह में पढ़े गए श्लोक का धार्मिक स्वरूप गायत्री मंत्र नहीं था।










