पुलिसकर्मी शेर सिंह का बर्खास्तगी का फैसला
जंतर-मंतर पर आयोजित जन-आंदोलन के दौरान भाषण देने वाले पुलिसकर्मी शेर सिंह के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई है। उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इस निर्णय में पिथौरागढ़ के एसएचओ ने मुख्य भूमिका निभाई है। पुलिस विभाग का कहना है कि शेर सिंह ने अनुशासन, ईमानदारी और सेवा के मानकों का उल्लंघन किया है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। विभागीय जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह कदम उठाया गया है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान शेर सिंह का विवादित भाषण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शेर सिंह ने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान मंच पर चढ़कर अभिजीत दीपके का समर्थन करते हुए भाषण दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद को बागी बताते हुए पुलिस बैज उतारकर अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा था कि वह आज ही अपनी पुलिस नौकरी छोड़ रहे हैं। बाद में उन्होंने अपना इस्तीफा पत्र भी दिखाया।
शेर सिंह पर लगे आरोप और विभागीय प्रतिक्रिया
उत्तराखंड पुलिस ने बताया कि शेर सिंह पहले से ही सस्पेंड चल रहे थे। उन पर गैंगस्टर के साथ मिलकर उगाही करने का आरोप था। पिछले हफ्ते शेर सिंह ने अपने बयान में कुमाऊं आईजी निवेदिता कुकरेती को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि वह खुद अपनी हिस्ट्रीशीट खोलेंगे और साबित करेंगे कि उन्हें गलत तरीके से बदनाम किया जा रहा है। शेर सिंह ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने गांवों में 85 से अधिक भीम पाठशालाएं खोली हैं।
शेर सिंह पर आरोप और विभागीय जांच का विवरण
जांच के दौरान पता चला कि शेर सिंह वर्ष 2025 से एक गंभीर आपराधिक मामले में आरोपी हैं। उनके खिलाफ हरिद्वार के गंगनहर थाने में एफआईआर संख्या 415/2025 दर्ज की गई है। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 471 और 120-बी के साथ ही भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 111(2)(बी), 351(2) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि शेर सिंह का संबंध कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के गिरोह से था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने मनीष बॉलर, हसन अब्बास जैदी जैसे आरोपियों के साथ मिलकर अवैध कब्जा और आर्थिक लाभ के लिए लोगों को डराया।










