मध्य प्रदेश में फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश, चार गिरफ्तार
ग्वालियर (Gwalior) में पुलिस ने एक धोखाधड़ी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है, जिसमें चार आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। ये आरोपी अमेरिकी नागरिकों को लोन दिलाने का झांसा देकर सोशल सिक्योरिटी नंबर, बैंक खातों की जानकारी और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर गिफ्ट वाउचर प्राप्त कर ठगी कर रहे थे। पुलिस ने मौके से लैपटॉप, मोबाइल और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए हैं।
अमेरिकी नागरिकों का डेटा हासिल कर ठगी का खेल
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी अमेरिकी नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा प्राप्त कर उन्हें फोन के माध्यम से संपर्क करते थे। वे कम ब्याज दर पर लोन दिलाने का लालच देकर भरोसा जीतते थे और फिर उनसे संवेदनशील जानकारी और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर गिफ्ट वाउचर की मांग करते थे।
मोहना थाना प्रभारी विनय सिंह तोमर के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे फरार मास्टरमाइंड प्रवल प्रताप सिंह परिहार के निर्देश पर काम कर रहे थे। आरोपियों ने यह भी बताया कि अमेरिकी नागरिकों का डेटा व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए प्राप्त होता था। इसके बाद वे खुद को अमेरिका की ‘Lending Club’ नामक वित्तीय संस्था का प्रतिनिधि बताकर पीड़ितों से संपर्क करते थे।
ठगी के लिए इस्तेमाल हुई डिजिटल सामग्री और वेतन
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे हर महीने 15 हजार से 20 हजार रुपये तक नकद वेतन प्राप्त करते थे, साथ ही ठगी की रकम का पांच प्रतिशत कमीशन भी मिलता था। गिरफ्तार आरोपियों में गुजरात के अहमदाबाद निवासी 26 वर्षीय अभिषेक राजपूत, 31 वर्षीय शिवेंद्र सिंह परिहार, उत्तर प्रदेश के झांसी निवासी 20 वर्षीय आर्यन राजपूत और नागालैंड के दीमापुर निवासी 23 वर्षीय शुभोम घोष शामिल हैं।
पुलिस ने इनके पास से चार लैपटॉप, सात मोबाइल फोन, हेडफोन, ठगी में इस्तेमाल होने वाली स्क्रिप्ट, अमेरिकी ग्राहकों का डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए हैं।
पुलिस ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश शुरू कर दी है और मामले को भारतीय दंड संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के तहत दर्ज किया है। जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने अमेरिकी नागरिक इस गिरोह का शिकार हुए हैं और कुल ठगी की रकम कितनी है।
अभी भी इस गिरोह के मुख्य आरोपी प्रवल प्रताप सिंह परिहार की गिरफ्तारी का प्रयास जारी है, और पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे रैकेट का पर्दाफाश कर लिया जाएगा।









