बिहार चुनाव में गठबंधन की आंतरिक कलह बढ़ती जा रही है
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच घमासान तेज हो गया है, खासकर एनडीए (NDA) के भीतर ही सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद उभर कर सामने आए हैं। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच सीटों को लेकर चल रही जंग ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है।
चिराग पासवान का राजनीतिक रुख और सीटों का विवाद
2020 के चुनाव में अकेले ही चुनाव लड़ने वाले चिराग पासवान का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि उनकी पार्टी कम से कम 43 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, उन्हें 25 सीटें मिलने की चर्चा थी, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया है। चिराग ने अपने समर्थकों के बीच यह संकेत भी दिया है कि वे अपनी पार्टी के लिए सीटों की संख्या को लेकर कोई समझौता नहीं करेंगे।
चिराग पासवान ने अपने रुख को कविता के माध्यम से भी व्यक्त किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि जुर्म करना मत, और सहना भी मत। जीवन में संघर्ष और लड़ाई को ही अपना रास्ता मानने का संदेश दिया। वे अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग सीटों की मांग कर रहे हैं, जैसे ब्रह्मपुर, गोविंदगंज और हिसुआ।
मजबूत रुख के साथ जीतन राम मांझी की स्थिति
वहीं, जीतन राम मांझी भी सीटों को लेकर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि उन्हें न्याय चाहिए तो उन्हें कम से कम 15 सीटें दी जानी चाहिए। पहले वे 20-25 सीटों की मांग कर रहे थे, लेकिन अब वे 15 सीटों पर ही सहमति देने को तैयार नहीं हैं। उनका आरोप है कि भाजपा (BJP) वादे पूरे नहीं कर रही है, जैसे कि लोकसभा और राज्यसभा सीटों का वादा।
मांझी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उन्हें उचित सीटें नहीं मिलीं तो वे चुनाव नहीं लड़ेंगे, भले ही उनका पार्टी का मान्यता प्राप्त होना जरूरी हो। उनका कहना है कि वे NDA (National Democratic Alliance) का हिस्सा रहेंगे, लेकिन चुनाव लड़ने से पहले सीटों का उचित बंटवारा जरूरी है।
महागठबंधन में सीटों का विवाद और संभावित परिणाम
बिहार के महागठबंधन (Grand Alliance) में भी सीटों को लेकर मतभेद गहरा हो रहा है। तेजस्वी यादव के सामने मुकेश सहनी अपनी शर्तें रख रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने कहा है कि वे केंद्रीय चुनाव समिति की अंतिम लिस्ट के आधार पर ही चुनाव लड़ेंगे। वामपंथी दल भी अपनी मांगें लेकर सामने आए हैं, जो पिछली बार की तुलना में अधिक सीटें चाह रहे हैं।
पिछले चुनाव में 144 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली आरजेडी (RJD) इस बार 135 से नीचे नहीं जाना चाहती, जबकि कांग्रेस ने 55 से 60 सीटों की मांग की है। मुकेश सहनी अपनी पार्टी के लिए 30 सीटें मांग रहे हैं, साथ ही डिप्टी सीएम पद की भी इच्छा जाहिर कर चुके हैं।
सीट बंटवारे में मुख्य चुनौतियां और संभावित खतरे
सीटों के बंटवारे को लेकर मुख्य समस्याएं हैं-पहला, हर दल को मिलने वाली सीटों का निर्धारण, दूसरा, जीतने की संभावना के आधार पर सीटों का निर्धारण, तीसरा, पिछले विधानसभा और लोकसभा के प्रदर्शन का प्रभाव। इन सभी कारकों के चलते यदि समझौता नहीं हो पाया तो छोटे दल गठबंधन छोड़ सकते हैं या नई पार्टियों के साथ जाने का विकल्प तलाश सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीटों का बंटवारा सही ढंग से नहीं हुआ तो इससे छोटे दलों का गठबंधन टूट सकता है, और नए विकल्प जैसे प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी चुनावी मैदान में उतर सकती है। इससे बिहार की राजनीतिक तस्वीर बदलने की संभावना बढ़ गई है।










