जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक का अस्पताल में स्थानांतरण
पिछले बीस दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस का कहना है कि यह कदम उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इस पूरी कार्रवाई की योजना भी अत्यंत गोपनीय और सुनियोजित तरीके से बनाई गई थी।
पुलिस की रणनीति और ऑपरेशन का विवरण
दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों के अनुसार, नए पुलिस आयुक्त के कार्यभार संभालने के बाद हुई पहली उच्चस्तरीय बैठक में वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद तय किया गया कि यह कार्रवाई सुबह के उस समय की जाएगी जब प्रदर्शन स्थल पर सबसे कम लोग मौजूद हों और किसी भी तरह के टकराव की आशंका न हो।
तीन चरणों में सोनम वांगचुक का अस्पताल पहुंचाना
पुलिस ने इस ऑपरेशन को तीन चरणों में अंजाम दिया। सबसे पहले, बिना वर्दी वाले पुलिसकर्मियों ने मंच को अपने नियंत्रण में लिया और सोनम वांगचुक के बिस्तर को सफेद चादरों से ढक दिया ताकि भीड़ में अफरा-तफरी न फैले। फिर उन्हें सावधानीपूर्वक उठाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया।
दूसरे चरण में, सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों ने बैरिकेडिंग के बाहर मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित किया। तीसरे चरण में, दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पूरे ऑपरेशन की निगरानी करते रहे, साथ ही एंबुलेंस और पुलिस वाहनों की आवाजाही पर भी नजर रखी गई।
जैसे ही सोनम वांगचुक को अस्पताल पहुंचाया गया, ट्रैफिक पुलिस ने पहले से तैयार ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से सफदरजंग अस्पताल तक का रास्ता खाली कराया, जिससे एंबुलेंस बिना किसी रुकावट के सीधे अस्पताल पहुंच सकी।
सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन की जानकारी केवल कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को ही थी। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों को निर्धारित समय पर पहुंचने के निर्देश दिए गए थे, जबकि उन्हें पूरी योजना की जानकारी पहले से नहीं दी गई थी।
इधर, अस्पताल के डॉक्टरों और पैरामेडिकल टीम ने सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य जांचा और बिगड़ती हालत को देखते हुए तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। इसके बाद, सफदरजंग अस्पताल में उनके इलाज के लिए विशेष टीम तैनात की गई।
वहीं, प्रदर्शन स्थल पर लौटने के बाद अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि उनकी गैरमौजूदगी में सोनम वांगचुक को वहां से हटाया गया। उन्होंने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए खुद अनशन पर बैठने का ऐलान किया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण, संयमित और अदालत के निर्देशों के अनुरूप की गई।










