श्रद्धा वॉकर मर्डर केस में अदालत का कठोर रवैया
दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में श्रद्धा वॉकर हत्या मामले में आरोपी आफताब अमीन पूनावाला को परीक्षा देने के लिए एक दिन की राहत दी, जिसके बाद यह सवाल उठने लगे कि क्या अदालत लगातार आरोपी की स्थगन की मांगों को स्वीकार कर रही है। इस वजह से इस हाई-प्रोफाइल केस की सुनवाई धीमी हो गई है।
हालांकि, इंडिया टुडे को प्राप्त अदालत के आदेशों की समीक्षा से स्पष्ट होता है कि ट्रायल शुरू होने के बाद भी अदालत ने तेज सुनवाई पर जोर दिया है। उसने बचाव पक्ष की देरी की रणनीतियों को खारिज किया और गवाहों की बिना रुकावट गवाही पूरी कराने के लिए लगातार नई तारीखें तय की हैं।
सुनवाई की प्रक्रिया और अदालत के आदेश
यह मामला अब तक तीन अलग-अलग जजों के समक्ष सुना गया है। अदालत ने कई आदेशों में कहा है कि बचाव पक्ष अनावश्यक स्थगन की मांग कर रहा है। कई बार अंतिम मौका देकर जिरह के लिए तारीखें दी गई हैं और चेतावनी दी गई है कि कार्यवाही में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यहां तक कि अदालत ने आरोपी आफताब पूनावाला की एक अर्जी को भी खारिज कर दिया है।
अदालत ने मई 2022 में श्रद्धा वॉकर की हत्या के बाद से ही तेज सुनवाई का निर्देश दिया था। अभियोजन पक्ष ने 212 से अधिक गवाहों का हवाला दिया है, जिनमें से कई दिल्ली के बाहर से आ रहे हैं। इसलिए, सुनवाई को सीमित करना उचित नहीं माना गया। इसके बाद, अदालत ने रोजाना सुनवाई और ब्लॉक कैलेंडर के तहत हर महीने केवल दो तारीखें तय करने का आदेश दिया।
सुनवाई में देरी और अंतिम अवसर
अदालत के रिकॉर्ड बताते हैं कि कम से कम सात बार सुनवाई में देरी को लेकर चिंता जताई गई है। फरवरी 2024 में जज मनीषा खुराना ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वकील कार्यवाही को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। मई 2024 में अदालत ने फिर कहा कि बचाव पक्ष के वकील जानबूझकर कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं।
अगस्त 2024 में अदालत ने कहा कि आरोपी जानबूझकर गवाहों की जिरह में देरी कर रहा है, जिसके कारण कुछ गवाहों से जिरह का अधिकार खत्म कर दिया गया है। दिसंबर 2025 में अदालत ने फिर से वकील की अनुपस्थिति का हवाला दिया और कहा कि यदि वकील उपलब्ध नहीं हैं तो आरोपी नया वकील नियुक्त कर सकता है।
अंत में, अदालत ने ट्रायल की धीमी प्रगति पर चिंता जताते हुए अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों को निर्देश दिया कि वे सुनवाई को तेज करें। कई बार अंतिम अवसर देकर गवाहों की जिरह पूरी करने का प्रयास किया गया है, और अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी अनावश्यक स्थगन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।











