विपक्ष का समर्थन और सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल
जंतर मंतर पर चल रहे सीजेपी के प्रदर्शन को अब 24 दिन हो चुके हैं, और सोनम वांगचुक 28 जून से अपनी भूख हड़ताल पर हैं। उनके शरीर का वजन अब तक 8.2 किलोग्राम घट चुका है, जिससे उनकी सेहत गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। इस संकट के बीच, विभिन्न राजनीतिक हस्तियों जैसे अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव ने सोनम से अनशन समाप्त करने की अपील की है।
सोनम वांगचुक की सेहत और विपक्ष की प्रतिक्रिया
केजरीवाल ने कहा कि वांगचुक देश की एक अनमोल शख्सियत हैं और उन्हें अपनी भूख हड़ताल तुरंत खत्म कर देनी चाहिए, क्योंकि संघर्ष के कई रास्ते मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) सीजेपी की मांगों का समर्थन करती है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। साथ ही, उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया ताकि पेपर लीक जैसी घटनाएं रोकी जा सकें और छात्रों को आगे की पढ़ाई में परेशानी न हो। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी भी सोमवार को जंतर मंतर पहुंचकर वांगचुक से मिल चुकी हैं।
स्वास्थ्य की चिंता और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
सीजेपी वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ रही है। आयोजकों के अनुसार, उनका वजन अब तक 8.2 किलोग्राम कम हो चुका है। उनका ताजा ब्लड प्रेशर 107/70 मिमीएचजी और ब्लड शुगर का स्तर 67 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर है, जो चिंता का विषय है। भूख हड़ताल पर बैठे आइसा कार्यकर्ता दीपक की तबीयत सोमवार को खराब होने पर उन्हें आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि भाजपा सरकार असंवेदनशील है और उसकी नज़र में किसी की भी जान की कीमत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक का जीवन पूरी दुनिया के लिए बहुमूल्य है, क्योंकि वे इंसानियत, पर्यावरण और लोकतंत्र के प्रति समान भाव रखते हैं।
इसके अलावा, अखिलेश यादव ने भाजपा पर अयोध्या के राम मंदिर में दान की चोरी का भी आरोप लगाया और कहा कि जो लोग मंदिरों तक को नहीं छोड़ते, वे सत्याग्रह की महत्ता क्या समझेंगे। मशहूर लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और अर्थशास्त्री जयति घोष जैसे कई प्रसिद्ध व्यक्तियों ने सोमवार को एक संयुक्त बयान जारी कर प्रदर्शनकारियों से भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई लंबी है और इसके लिए प्रदर्शनकारियों का जीवित रहना जरूरी है। साथ ही, उन्होंने दिल्ली के नागरिकों से 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च में भाग लेने का आग्रह किया, जो संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही होगा।









