सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल और नागरिक जागरूकता का संदेश
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक पिछले 15 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर हैं, जो देश में नागरिक अधिकारों और पारदर्शिता के मुद्दों को उजागर करने का एक प्रयास है। इस दौरान उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे उन्हें ‘आधुनिक गांधी’ या कोई हीरो न समझें। वांगचुक का मानना है कि हर व्यक्ति को अपने जीवन का हीरो खुद बनना चाहिए। उन्होंने साथ ही 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च में भाग लेने का भी आह्वान किया, ताकि भ्रष्टाचार और परीक्षा में धांधली जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई जा सके।
अपनी जिम्मेदारी खुद निभाने का संदेश और जनता से जुड़ने का आग्रह
वांगचुक ने सोशल मीडिया पर समर्थन प्राप्त करने के बाद कहा कि कई लोग उन्हें 21वीं सदी का गांधी या आधुनिक गांधी कहकर सम्मानित कर रहे हैं, लेकिन वह इन उपमाओं से असहज महसूस करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह न तो गांधी हैं और न ही कोई हीरो। उनका मानना है कि हर नागरिक को अपने कर्तव्य का निर्वहन स्वयं करना चाहिए। उन्होंने जनता से अपील की कि वे दूसरों में हीरो खोजने के बजाय अपने आप को हीरो बनें और अपने फर्ज को निभाएं।
20 जुलाई को संसद मार्च में भाग लेने का आह्वान और छात्रों के प्रति सहानुभूति
भ्रष्टाचार और परीक्षा में धांधली के कारण छात्रों की आत्महत्याओं पर दुख व्यक्त करते हुए वांगचुक ने कहा कि यदि उन छात्रों में से कोई आपकी बहन या बेटी होती, तो आप भी उनके साथ होते। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे इस स्थिति का इंतजार न करें। यदि आप हर रोज नहीं आ सकते, तो कम से कम 20 जुलाई को जंतर-मंतर जरूर आएं। जो लोग दिल्ली नहीं पहुंच सकते, वे अपने स्थान पर उपवास रखें और अपना संदेश सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करें।
वांगचुक ने आगामी संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च में भाग लेने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी को 24 दिनों तक भूखा रहने की जरूरत नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्य का एहसास कराते हुए उस दिन साथ जुड़ें।
बता दें कि सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार गिर रही है, और उनके वजन में अब तक 7.5 किलोग्राम की कमी हो चुकी है। शनिवार को उनका ब्लड प्रेशर 106/74 mm Hg रिकॉर्ड किया गया था, जो उनके स्वास्थ्य की गंभीरता को दर्शाता है।









