पटना-गया रेलखंड पर हाईटेंशन तार चोरी का मामला
बिहार के पटना-गया रेलवे मार्ग पर गुरुवार तड़के एक चौंकाने वाली घटना हुई, जिसने रेलवे अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। चोरों ने सामान्य बिजली के तार नहीं, बल्कि 25 हजार वोल्ट की उच्चतम क्षमता वाली ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) लाइन को निशाना बनाया। इस घटना ने पूरे रेल नेटवर्क की गति को रोक दिया और लगभग तीन घंटे तक ट्रेनों का संचालन बाधित रहा।
घटना का स्थान और प्रभावित ट्रेनों का संचालन
यह घटना जहानाबाद जिले के तेहटा और जहानाबाद स्टेशन के बीच हुई। रात के करीब 3 बजे रेलवे कंट्रोल को सूचित किया गया कि डाउन लाइन की ओएचई लाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। जांच में पता चला कि चोरों ने तार चोरी करने के प्रयास में उसे काट दिया। जैसे ही ओएचई लाइन टूटी, डाउन लाइन पर बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।
सुरक्षा चूक और रेलवे की प्रतिक्रिया
इस घटना का असर सीधे ट्रेनों पर पड़ा, कई ट्रेनों को रास्ते में ही रोकना पड़ा और कुछ को पूरी तरह से खड़ा कर दिया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रेलवे ने तुरंत सिंगल लाइन वर्किंग शुरू की, जिसमें अप लाइन का उपयोग कर डाउन दिशा की ट्रेनों को धीरे-धीरे निकाला गया ताकि पूरे सिस्टम का संचालन बाधित न हो।
दानापुर रेल मंडल से मिली जानकारी के अनुसार, रेलवे की सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन चोर पहले ही फरार हो चुके थे। आसपास के एक गड्ढे में कटा हुआ हाईटेंशन तार मिला, जिसे देखकर माना जा रहा है कि चोर उसे लेकर भागने की योजना बना रहे थे। पुलिस की आहट मिलते ही वे तार छोड़कर भाग गए।
इसके बाद रेलवे की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त ओएचई लाइन की मरम्मत की, सिग्नल सिस्टम को पुनः चालू किया और सुबह लगभग 6:26 बजे लाइन को सुरक्षित घोषित कर दिया। इसके बाद ट्रेनों का संचालन धीरे-धीरे सामान्य हो सका।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी चोरी और किसी को खबर तक नहीं लगी। घटना स्थल से आरपीएफ पोस्ट और जीआरपी थाने की दूरी बहुत कम होने के बावजूद, चोर आराम से हाईटेंशन तार काटने में सफल रहे। यह सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है कि 25 हजार वोल्ट की लाइन जैसी संवेदनशील वस्तु को बिना किसी रोक-टोक के कैसे पहुंचा गया।
ईस्ट सेंट्रल रेलवे के सीपीआरओ सरस्वती चंद्र के अनुसार, चोरी किया गया तार बरामद कर लिया गया है। प्रभावित ट्रेनों को सिंगल लाइन वर्किंग के जरिए निकाला गया और लगभग तीन घंटे बाद परिचालन फिर से शुरू हो गया। आरपीएफ अब चोरों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने में जुटी है। रेलवे यह भी जांच कर रहा है कि इतनी संवेदनशील लाइन तक चोर कैसे पहुंचे और सुरक्षा में कहां चूक हुई।










