शिवसेना के चुनाव चिह्न और नाम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न से संबंधित दावेदारी का मामला सुना गया। इस दौरान उद्धव ठाकरे गुट ने इस मामले की त्वरित सुनवाई की मांग की और स्थानीय चुनावों का हवाला दिया। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 12 नवंबर की तारीख तय की है।
उद्धव ठाकरे की ओर से इस विवाद को जल्द सुलझाने की अपील की गई थी। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि महाराष्ट्र में जनवरी में स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं, इसलिए इस मामले का शीघ्र निपटारा जरूरी है।
पार्टी के नियंत्रण को लेकर चल रहा विवाद
महाराष्ट्र में शिवसेना के दो धड़ों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर महीनों से विवाद चल रहा है। एक तरफ उद्धव ठाकरे का गुट है, तो दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे का समूह है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में फिर चर्चा का विषय बन गया है। बुधवार को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई 12 नवंबर को तय की है।
आयोग के फैसले और पार्टी की आंतरिक स्थिति
चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को ‘असली शिवसेना’ के रूप में मान्यता दी और पार्टी का नाम तथा चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को सौंपा। इस फैसले को उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। ठाकरे गुट का तर्क था कि आयोग ने पार्टी की वास्तविक संरचना और तथ्यों को नजरअंदाज किया है।
कपिल सिब्बल ने कोर्ट से आग्रह किया कि जनवरी 2026 में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव से पहले इस विवाद का समाधान जरूरी है, ताकि मतदाताओं और पार्टी के बीच भ्रम न फैले। उन्होंने कहा कि इस मामले का जल्द निपटारा राजनीतिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
उद्धव ठाकरे की याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने संविधान और पार्टी के आंतरिक नियमों का उल्लंघन किया है। वहीं, शिंदे गुट का दावा है कि उनके पास पार्टी के अधिकांश विधायक और सांसद हैं, इसलिए वे ही असली शिवसेना हैं। अब इस विवाद की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।











