दिल्ली में नकली खाद्य उत्पादों का बड़ा खुलासा
दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक महत्वपूर्ण छापेमारी कर नकली खाद्य सामग्री के रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में वेस्टएंड कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी पर आरोप है कि वह एक्सपायर्ड खाद्य उत्पादों पर फर्जी तरीके से निर्माण और एक्सपायरी डेट डालकर उन्हें पुनः बाजार में बेच रही थी। पुलिस ने इस छापेमारी के दौरान 40 हजार से अधिक संदिग्ध फूड पैकेट जब्त किए हैं, जिनमें टाटा नमक, मैगी, कोल्ड ड्रिंक जैसे रोजाना इस्तेमाल होने वाले उत्पाद शामिल हैं। इस मामले में पुलिस ने तुरंत ही संबंधित कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
खाद्य सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा अभियान और बरामदगी
यह कार्रवाई भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उत्तरी क्षेत्रीय कार्यालय की टीम ने 3 जुलाई 2026 को की। गुप्त सूचना के आधार पर हुई इस छापेमारी में पता चला कि वेस्टएंड कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी अपने खाद्य उत्पादों के लेबल को व्यवस्थित रूप से हटा कर फिर से प्रिंट कर रही थी। जांच के दौरान, टीम ने मौके से 20 लाख रुपये से अधिक मूल्य के एक्सपायर्ड फूड प्रोडक्ट्स भी जब्त किए। इनमें प्रमुख ब्रांड जैसे बौरनविटा, मैगी, थम्स अप, फैंटा, हॉर्लिक्स, घी, पेपर बोट जूस, कोल्ड ड्रिंक के पैक, और कई अन्य राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ब्रांड शामिल हैं। साथ ही, फर्जी प्रिंटिंग मशीनें, लेबल, स्टिकर, बैच नंबर, और एमआरपी स्टिकर भी जब्त किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल इन फर्जी उत्पादों को फिर से पैक करने में किया जा रहा था।
फर्जीवाड़े का तरीका और पुलिस की कार्रवाई
जांच में पता चला कि यह रैकेट लेबल बदलने और नकली उत्पाद बनाने के लिए विशेष मशीनों का इस्तेमाल कर रहा था। फूड प्रोडक्ट्स पर मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और बैच नंबरों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया था। पुलिस और FSSAI की टीम ने मौके से स्टैंप, रासायनिक विलायक (केमिकल सॉल्वैंट्स), और प्रिंटिंग मशीनरी भी जब्त की, जिनका उपयोग लेबल को बदलने और नकली बनाने के लिए किया जा रहा था। इन सबके माध्यम से, कथित तौर पर एक्सपायर्ड उत्पादों को दोबारा पैक कर बाजार में बेचा जा रहा था। इस संदिग्ध कारोबार में शामिल ऑपरेटर के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया है।
FSSAI ने स्पष्ट किया है कि मिलावट, मिसब्रांडिंग और धोखाधड़ी के खिलाफ उसकी ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति है। इस संबंध में, 2006 के खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, नागरिकों से अपील की गई है कि वे संदिग्ध प्रोडक्ट्स या नकली ब्रांडों की जानकारी मोबाइल ऐप ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’, ऑनलाइन पोर्टल ‘FoSCoS’ या ईमेल के माध्यम से दें। हर शिकायत की गंभीरता से जांच की जाएगी ताकि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को खतरे में डालने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।









