भारत और पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर संयुक्त रुख
ऐसे समय में जब विश्व के कई प्रमुख देश अफगानिस्तान की स्थिरता के लिए प्रयासरत हैं, भारत और पाकिस्तान ने एक साथ आकर इस क्षेत्र में अपनी चिंताओं को व्यक्त किया है। दोनों देशों ने मिलकर अफगानिस्तान में स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा को बनाए रखने पर जोर दिया है। यह सहयोग इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों की राय में कुछ समानता है, खासकर जब बात आतंकवाद और सैन्य स्थिरता की हो।
रूस और चीन का समर्थन और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा
मॉस्को (Moscow) में आयोजित मास्को प्रारूप की सातवीं बैठक में अफगानिस्तान, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन (China), किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस (Russia), ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संयुक्त प्रयासों पर चर्चा हुई। ज्वाइंट स्टेटमेंट में स्पष्ट किया गया कि किसी भी देश का अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को क्षेत्र में तैनात करना अस्वीकार्य है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय शांति प्रभावित हो सकती है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अफगानिस्तान में स्थिरता बनाए रखना और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर कदम उठाना था।
अमेरिका का बगराम एयरबेस पर दावा और भारत की प्रतिक्रिया
अमेरिका (US) ने बगराम एयरबेस (Bagram Airbase) को लेकर फिर से नियंत्रण पाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बार-बार अफगानिस्तान के तालिबान शासकों से इस सैन्य अड्डे को वापस लेने का आग्रह किया है। 2020 में हुए समझौते के तहत अमेरिका ने काबुल से अपनी सेना हटाने का फैसला किया था, लेकिन ट्रंप ने इस एयरबेस को फिर से हासिल करने की इच्छा जाहिर की। भारत ने इस अमेरिकी प्रयास का विरोध किया है, और कहा है कि अफगानिस्तान की जमीन किसी भी विदेशी ताकत को नहीं दी जाएगी। भारत का मानना है कि इस तरह के कदम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक हो सकते हैं।











