राजस्थान में सोन चिरैया संरक्षण में बड़ी सफलता
राजस्थान के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है, जहां विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी सोन चिरैया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के तीन नए चूजों का जन्म हुआ है। इन नए प्रजननों के साथ ही संरक्षण केंद्रों में सुरक्षित रखे गए गोडावणों की कुल संख्या अब 94 हो गई है। यह उपलब्धि इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण अभियान में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
प्रोजेक्ट बस्टर्ड के तहत जैसलमेर में हुई नई प्रजनन सफलता
जैसलमेर में चल रहे ‘प्रोजेक्ट बस्टर्ड’ के अंतर्गत संचालित संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम में इन तीनों चूजों का जन्म हुआ है। इनमें से एक चूजा प्राकृतिक तरीके से दिए गए अंडे से निकला है, जबकि दो चूजे संरक्षण केंद्र में रखे गए अंडों से जन्मे हैं। पिछले चार वर्षों में जैसलमेर के दो ब्रीडिंग सेंटरों में कुल 26 चूजों का जन्म हो चुका है, जिनमें से 18 चूजे आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन से, 4 प्राकृतिक प्रजनन से और 4 जंगल से सुरक्षित लाए गए अंडों से पैदा हुए हैं।
संरक्षण प्रयासों में मिली निरंतर सफलता और आगे की उम्मीदें
वन विभाग ने ‘जंपस्टार्ट इंटरवेंशन’ नामक पहल के तहत जंगल से सुरक्षित लाए गए तीन अंडों से भी स्वस्थ चूजों का विकास किया है। इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य सोन चिरैया की आनुवंशिक विविधता बनाए रखना और अंडों को शिकारियों तथा अन्य खतरों से सुरक्षित करना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रजनन सीजन में और भी चूजों के जन्म की संभावना है, जिससे इस दुर्लभ पक्षी की घटती आबादी को पुनः मजबूत करने की उम्मीद जगी है।









