बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर मामला विवादों में फंसा
बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए कथित एनकाउंटर ने नई जटिलताएं पैदा कर दी हैं। मृतक भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने उनके घर पहुंचकर परिवार को मामले को दबाने का दबाव बनाया।
आशा देवी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि घटना के आठ दिन बाद एसपी उनके घर आए। बिना महिला पुलिसकर्मी के घर पहुंचकर उन्होंने परिवार से कहा कि इस मामले को यहीं खत्म कर दीजिए और मीडिया में अधिक बयानबाजी न करें। यदि ऐसा नहीं किया गया तो बेटे (भरत) की तरह ही उन्हें भी मारने की धमकी दी गई।
मां के आरोप और पुलिस का जवाब
आशा देवी का आरोप है कि एसपी ने उनके छोटे बेटे चंदन तिवारी को अलग ले जाकर कहा कि भरत अपराधी था, जिसने थानेदार पर बंदूक तानी थी, इसलिए उसे मार दिया गया। इसके साथ ही, चंदन को यह भी धमकी दी गई कि यदि वह भी इसी तरह बोलता रहा तो उसका भी वही हाल किया जाएगा।
वहीं, भोजपुर एसपी (राज) ने इन आरोपों का खंडन करते हुए वॉट्सऐप के जरिए कहा कि ये सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस इस न्यायिक जांच में पूरी तरह से सहयोग कर रही है और मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
आरोपों के बीच न्यायिक जांच और सरकार की प्रतिक्रिया
भरत तिवारी के परिजन लगातार इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन तेज करेंगे। परिजनों का कहना है कि यदि न्याय नहीं मिला तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी और मुख्यमंत्री (सम्राट चौधरी) को भी जवाब देना पड़ेगा।
इस बीच, भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर की न्यायिक जांच पहले से ही चल रही है। परिजन इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पुलिस ने इस मामले में जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ), शाहपुर थाना अध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह कदम परिजनों की शिकायत और सवालों के जवाब में उठाया गया है।
बिहार के बेलौटी गांव में पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत का मामला लगातार चर्चा में है। परिजनों के आरोप, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और नेताओं की जांच की मांग ने इस पूरे प्रकरण को और भी जटिल बना दिया है।
मृतक भरत तिवारी के परिजन दावा कर रहे हैं कि वह फेसबुक लाइव कर रहा था और पुलिस के सामने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर चुका था। ऐसे में सवाल उठता है कि सरेंडर के बाद पुलिस ने गोली क्यों चलाई।











