देशभर में मोहर्रम की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
देश के विभिन्न राज्यों में मोहर्रम के त्योहार को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए जुलूसों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। इन इलाकों में ताजियों की ऊंचाई सीमित कर दी गई है, और ड्रोन तथा सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। साथ ही, फ्लैग मार्च निकालकर सुरक्षा का संदेश दिया जा रहा है और हथियारों के प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है। भोपाल में एक कथित ब्लास्ट प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और भी सख्त कर दी गई है।
उत्तर प्रदेश में मोहर्रम सुरक्षा और कानून का कड़ाई से पालन
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोहर्रम को लेकर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में कोई भी व्यक्ति कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश दंगों और माफिया की गिरफ्त में था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि मोहर्रम के दौरान कोई भी हथियारों का प्रदर्शन नहीं करेगा, सड़क पर गुंडागर्दी नहीं होगी, और यदि कोई उपद्रव करने का प्रयास करेगा तो उसके परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने होंगे।
सख्त सुरक्षा योजना और परंपरागत नियमों का पालन
संभल जिले में इस बार सुरक्षा व्यवस्था सबसे अधिक सख्त बनाई गई है। पिछले वर्षों की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने जिले को पांच जोन और 16 सेक्टर में विभाजित किया है। हर सेक्टर में मजिस्ट्रेट तैनात हैं और प्रत्येक ताजिए के साथ पुलिस का एक नोडल अधिकारी भी मौजूद है। पूरे जुलूस की निगरानी करीब 200 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से की जा रही है। जामा मस्जिद के पास बने कंट्रोल सेंटर से पूरे मार्ग पर नजर रखी जा रही है। इस बार जिले में कुल 329 ताजिए निकाले जाने हैं, और किसी भी गैर-परंपरागत मार्ग से जुलूस नहीं निकलेगा।
वहीं, संभल में ताजियों की ऊंचाई पहले 30 से 40 फीट तक जाती थी, लेकिन इस बार इसे अधिकतम 12 फीट तक सीमित कर दिया गया है। स्थानीय कारीगरों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि सुरक्षा सर्वोपरि है। आयोजकों का मानना है कि यह कदम सभी की सुरक्षा के लिए है और इसका पालन किया जाएगा।
अलीगढ़ में मुस्लिम समाज ने भी इस बार रक्तदान का निर्णय लिया है। कर्बला के मुतवल्ली सैयद मुख्तार जैदी ने कहा कि 12 फीट की सीमा का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। उन्होंने समाज से अपील की है कि मातम के दौरान बेवजह खून बहाने के बजाय रक्तदान कर जरूरतमंदों की मदद करें। इस अवसर पर रक्तदान शिविर भी लगाए गए हैं।
पूर्वी चंपारण में जिला प्रशासन और पुलिस ने मोहर्रम से पहले बड़े पैमाने पर फ्लैग मार्च निकाला है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक खुद सड़कों पर उतरकर सुरक्षा का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण पर्व मनाने की अपील की है और चेतावनी दी है कि उपद्रव फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जुलूस मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी की जा रही है।
उत्तराखंड के जसपुर में हाईकोर्ट के आदेश का असर दिख रहा है। अदालत ने निर्देश दिया है कि ताजियों की ऊंचाई 15 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए और किसी भी निजी या सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
इस बीच, राजस्थान के पाली में मोहर्रम के दौरान देर रात आग के करतब का प्रदर्शन हुआ, जिसमें एक युवक घायल हो गया।










