भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर पर पुलिस कार्रवाई तेज
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस ने अपनी जांच और कार्रवाई को और अधिक मजबूत कर दिया है। इस जाँच में पुलिस ने तीन अलग-अलग FIR दर्ज की हैं, जिनमें मृतक भरत तिवारी के साथ-साथ उसके पिता और भाई का नाम भी शामिल है। इसके साथ ही, एनकाउंटर के विरोध में सड़क जाम करने वाले प्रदर्शनकारियों पर भी मामला दर्ज किया गया है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने फर्जी तरीके से इस एनकाउंटर को अंजाम दिया है और वे दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
तीनों FIR में क्या आरोप लगाए गए हैं?
पहली FIR में मृतक भरत भूषण तिवारी, उनके पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को आरोपी बनाया गया है। शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार की शिकायत पर दर्ज इस FIR में अवैध हथियार रखने, पुलिस पर फायरिंग करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का दावा है कि जब टीम गुप्त सूचना के आधार पर भरत तिवारी के घर पहुंची, तो उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार, भरत ने कई राउंड फायरिंग की और उसके पिता व भाई को भी हथियार की जानकारी होने के कारण आरोपी बनाया गया है।
पुलिस का दावा और परिजनों का आरोप
पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी हथियार लेकर भाग रहा था और पुलिस ने पीछा करते हुए जब उसे रोका, तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान एक गोली सरकारी वाहन पर भी लगी। पुलिस का यह भी कहना है कि कई बार आत्मसमर्पण की चेतावनी देने के बावजूद वह नहीं माना, इसलिए आत्मरक्षा में फायरिंग करनी पड़ी। घायल होने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने घटनास्थल से एक देसी पिस्टल, मैगजीन, दो जिंदा कारतूस और दो खोखे भी बरामद किए हैं। FIR में बताया गया है कि भरत ने 10 से 12 राउंड फायरिंग की, जबकि पुलिस ने 5 राउंड फायरिंग का उल्लेख किया है।
दूसरी FIR में कथित मुठभेड़ को लेकर मामला दर्ज किया गया है। इसमें पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी हथियार लेकर भाग रहा था और पुलिस ने पीछा करते हुए उसे रोकने का प्रयास किया, तो उसने फायरिंग की। इस घटना में एक गोली सरकारी वाहन पर भी लगी। पुलिस का दावा है कि भरत ने आत्मसमर्पण की चेतावनी को नजरअंदाज कर फायरिंग की, जिसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। घायल होने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने घटनास्थल से हथियार और जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं।
तीसरी FIR में भरत तिवारी की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम को लेकर मामला दर्ज किया गया है। इस FIR में बेलौटी पंचायत के मुखिया बलिराम यादव समेत 14 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 50 से अधिक अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम, सरकारी कार्य में बाधा, धक्का-मुक्की और पथराव किया।
परिजनों और स्थानीय लोगों में इस कार्रवाई को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। मृतक की मां का आरोप है कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, फिर भी उसे गोली मार दी गई। उन्होंने पुलिस के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने और न्याय की मांग की है। इस पूरे मामले में पुलिस और परिवार के दावे अलग-अलग हैं, और अब जांच में ही सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।









