झारखंड में कांग्रेस की हार और राजनीतिक विवाद
झारखंड में हाल ही में सम्पन्न राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा, जबकि विधानसभा में INDIA गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या थी। इस चुनाव में NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत हासिल की, जिन्हें 28 वोट मिले, जबकि प्रणव झा को केवल 20 वोट प्राप्त हुए। यह परिणाम कई राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका गया क्योंकि विधानसभा में INDIA ब्लॉक के विधायकों की कुल संख्या 56 थी। यदि सभी गठबंधन के विधायकों ने वोटिंग की होती, तो जीत आसान होती।
बिहार और झारखंड में चुनावी नतीजों का असर
झारखंड के इस चुनाव के तुरंत बाद, कांग्रेस और RJD के नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप लगाने शुरू कर दिए। दोनों पक्षों ने क्रॉस-वोटिंग और गठबंधन के भीतर तालमेल की कमी का आरोप लगाया, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ गया। यह स्थिति उस समय की यादें ताजा कर देती है जब बिहार में भी इसी तरह का चुनाव हुआ था। उस समय, INDIA गठबंधन ने RJD उम्मीदवार एडी सिंह को समर्थन दिया था, लेकिन चार विधायकों के वोट न देने से हार का सामना करना पड़ा। इनमें से तीन कांग्रेस के और एक RJD का था। इस हार ने गठबंधन के भीतर नाराजगी की आशंका को जन्म दिया है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और गठबंधन की चुनौतियां
बिहार RJD ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि हरियाणा, ओडिशा और बिहार में कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की या अनुपस्थित रहकर BJP समर्थित उम्मीदवारों को मदद पहुंचाई। पार्टी ने विशेष रूप से तीन कांग्रेस विधायकों का नाम लिया, जो बिहार के चुनाव के दौरान गैरहाजिर थे। RJD ने सवाल किया कि क्या इन विधायकों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। साथ ही, RJD ने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने अपनी जिम्मेदारी से भागने की कोशिश की और सहयोगियों पर दोष मढ़ने का प्रयास किया। इन घटनाक्रमों ने INDIA गठबंधन के भीतर नई असमंजस और विपक्ष की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।










