दिल्ली में कोचिंग संस्थानों के लिए नए सुरक्षा नियमों का प्रस्ताव
राजधानी दिल्ली में लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों से जुड़े कोचिंग केंद्रों पर अब सरकार कड़े नियम लागू करने की योजना बना रही है। ओल्ड राजेंद्र नगर में 2024 में हुए दर्दनाक हादसे के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसमें कई छात्रों की जान चली गई थी। सरकार का उद्देश्य इन कोचिंग संस्थानों के लिए एक मजबूत नियामक ढांचा तैयार करना है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। यदि यह नीति लागू होती है, तो फीस, फायर सेफ्टी, बेसमेंट का उपयोग और भवन मानकों जैसे सभी पहलुओं पर स्पष्ट नियम तय होंगे।
कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों को मजबूत बनाने की दिशा में कदम
देशभर से छात्र दिल्ली के कोचिंग हब में बेहतर भविष्य की आशा लेकर आते हैं। मुखर्जी नगर, ओल्ड राजेंद्र नगर और लक्ष्मी नगर जैसे क्षेत्रों में ये संस्थान युवाओं के सपनों का केंद्र हैं। लेकिन इन स्थानों पर सुरक्षा को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर के एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में जलभराव के कारण हुई दुखद घटना ने पूरे देश को हिला दिया था, जिसमें कई छात्रों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा, भवन मानकों और प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस तेज हो गई।
नई सुरक्षा नीतियों का प्रस्ताव और प्रभाव
दिल्ली सरकार अब इस हादसे से सीख लेकर सभी कोचिंग केंद्रों को एक नियामक ढांचे के अंतर्गत लाने की योजना बना रही है। उच्च स्तरीय बैठक में शिक्षा एवं शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि प्रस्तावित नियमों में कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य पंजीकरण, फायर एनओसी, भवन सुरक्षा प्रमाणपत्र और आपातकालीन निकासी व्यवस्था शामिल हो सकती है। बेसमेंट के उपयोग पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। इसके साथ ही फीस, रिफंड नीति, बैच क्षमता, स्वच्छ शौचालय, पीने का पानी और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं के मानक भी निर्धारित किए जा सकते हैं। उल्लंघन करने पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और संस्थान बंद करने जैसी सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी हो सकता है।











