बिहार में पलायन के खिलाफ नई उम्मीदें जगा रही रिवर्स माइग्रेशन कहानी
वर्षों से बिहार की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक रहा है श्रमिकों का पलायन, जिसमें रोजगार की तलाश में लाखों लोग पंजाब, दिल्ली और अन्य राज्यों की ओर रुख करते हैं। लेकिन अब पटना से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो प्रवासी मजदूरों की घर वापसी और स्थानीय उद्योगों के विकास का नया उदाहरण बन रही है। यह कहानी दिखाती है कि कैसे बिहार में रोजगार के अवसर बढ़ाकर पलायन को रोका जा सकता है।
स्थानीय उद्योगों में नई जान फूंकने वाली पहल
पटना के बैरिया क्षेत्र में करीब पांच साल पहले उद्यमी निशांत रंजन ने स्पोर्ट्स उपकरण बनाने का स्टार्टअप ‘जावा स्पोर्ट्स’ शुरू किया। यह बिहार की उन पहली फैक्ट्रियों में से एक है, जहां क्रिकेट बैट, गेंद, हेलमेट, ग्लव्स और स्पोर्ट्स शूज जैसे खेल सामग्री का निर्माण किया जाता है। इस स्टार्टअप की खास बात यह है कि यहां काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी पहले पंजाब और अन्य राज्यों में खेल सामग्री बनाने वाली कंपनियों में काम करते थे। कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन के समय इन श्रमिकों को बिहार लौटने का मौका मिला, और उन्हें जावा स्पोर्ट्स में रोजगार मिल गया। इससे न केवल उनका पलायन रुका, बल्कि उन्होंने अपने घरों में रहकर काम करने का सुख भी पाया।
प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी और रोजगार का नया मॉडल
लॉकडाउन के बाद कई श्रमिक अपने घर लौट आए हैं, जैसे मुजफ्फरपुर के अजीत कुमार, जिन्होंने पंजाब की एक स्पोर्ट्स कंपनी में 22 वर्षों तक काम किया। बिहार लौटने के बाद उन्हें पटना की इस फैक्ट्री में नौकरी मिली, और अब वे अपने परिवार के साथ रहकर काम कर रहे हैं। अजीत कुमार का कहना है कि परिवार के साथ रहकर काम करने की खुशी सबसे बड़ी है। इसी तरह जालंधर में लगभग दस वर्षों तक काम करने वाले जय किशोर भी बिहार लौट आए हैं और उन्हें भी इसी फैक्ट्री में रोजगार मिला है। उनका मानना है कि यदि बिहार में और उद्योग स्थापित किए जाएं, तो बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक वापस लौट सकते हैं। वर्तमान में इस फैक्ट्री में लगभग 35 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से करीब 30 पहले पंजाब और अन्य राज्यों में काम करते थे। ये कर्मचारी मुख्य रूप से मुजफ्फरपुर, वैशाली और गया जिलों से हैं।











