बिहार में टेंडर घोटाले की जांच तेज, तीन वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी
बिहार में हुए टेंडर घोटाले के सिलसिले में बिहार सरकार की स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने बुधवार को महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए तीन वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इन अधिकारियों में भवन निर्माण विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर तरिणी दास, वित्त विभाग के जॉइंट सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी मुमुक्षु चौधरी और नगर विकास एवं आवास विभाग के पूर्व कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह शामिल हैं।
गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में भेजे गए अधिकारी
सभी गिरफ्तार अधिकारियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस कार्रवाई से राज्य प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और जांच को और तेज कर दिया गया है। यह कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति का हिस्सा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि किसी भी भ्रष्ट अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
पूर्व में भी हुई थी जांच और संपत्ति का खुलासा
इस मामले में पहले भी जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई की थी। विजिलेंस यूनिट ने कथित घोटाले के मास्टरमाइंड रिशुश्री और उसके करीबी सहयोगी संतोष कुमार को पटना से गिरफ्तार किया था। साथ ही पिछले सप्ताह ही राज्य सरकार ने दो IAS अधिकारियों को निलंबित किया था, जिनमें 2017 बैच के योगेश कुमार सागर और एक महिला अधिकारी शामिल थीं।
वर्ष 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस घोटाले से जुड़े अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें 11 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और संपत्ति बरामद हुई। जांच में पता चला कि सरकारी टेंडरों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है, और कई इंजीनियरों तथा अधिकारियों के नाम संदिग्ध पाए गए हैं। इस संदर्भ में जांच अभी भी जारी है और आगे और गिरफ्तारी की संभावना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।











