दिल्ली के हौज रानी अग्निकांड के बाद फ्लोरिश स्टे पर सवाल
दिल्ली में हौज रानी इलाके में हुई भीषण आग के बाद फ्लोरिश स्टे (Floorsh Stay) की संचालन प्रक्रिया और नियमों का गंभीरता से पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है। बी एंड बी (B&B) नीति के तहत अधिकतम छह कमरों की अनुमति होने के बावजूद, इस स्थान पर 25 कमरे किराये पर चलाए जाने का आरोप सामने आया है। इस मामले ने नगर निगम (MCD), दिल्ली जल बोर्ड (DJB), बिजली कंपनी (BSES), पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लाइसेंस और नियमों का उल्लंघन: फ्लोरिश स्टे का असली सच
मालिक लवकेश बजाज को छह कमरों का लाइसेंस प्राप्त था, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, फ्लोरिश स्टे में कुल 25 कमरे संचालित हो रहे थे। यह नियम के विपरीत था, क्योंकि लाइसेंस रेसिडेंशियल बी एंड बी के लिए था, जबकि यह पूरी तरह से व्यावसायिक रूप से संचालित हो रहा था। मालिक का वहां रहना भी आवश्यक था, लेकिन वह खुद वहां नहीं रहते थे। इससे स्पष्ट होता है कि यह संपत्ति पूरी तरह से कॉमर्शियल प्रॉपर्टी में तब्दील हो चुकी थी, जबकि लाइसेंस रेसिडेंशियल का था।
संबंधित एजेंसियों की अनदेखी और खामियां
मेट्रोपोलिटन कॉरपोरेशन (MCD) के पास रजिस्ट्रेशन और निरीक्षण का जिम्मा था, लेकिन जांच के अभाव में 25 कमरों का संचालन बिना किसी रोक-टोक के चलता रहा। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को भी पता था कि पानी की खपत सामान्य से अधिक हो रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बिजली कंपनी (BSES) ने घरेलू मीटर पर व्यावसायिक स्तर की बिजली खपत देखी, पर कोई कदम नहीं उठाया। इन सभी एजेंसियों की आंखें मूंदने से ही फ्लोरिश स्टे जैसी अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
पुलिस की भूमिका और उसकी कमजोरियां
2025 से पहले दिल्ली में होटल, गेस्टहाउस और बी एंड बी संचालनों के लिए पुलिस की मंजूरी अनिवार्य थी। यह मंजूरी केवल कागजी कार्रवाई नहीं थी, बल्कि पुलिस प्रॉपर्टी और मालिक की फिजिकल वेरिफिकेशन भी करती थी। इससे यह सुनिश्चित होता था कि कोई संदिग्ध गतिविधि या अपराधी तत्व इन स्थानों का उपयोग नहीं कर रहे हैं। लेकिन जून 2025 में एलजी वीके सक्सेना (V K Saxena) की सरकार ने गृह मंत्रालय की नोटिफिकेशन के माध्यम से इस मंजूरी की शर्त हटा दी। इसके बाद इन स्थानों पर पुलिस की पकड़ कमजोर हो गई, जिससे अवैध संचालन बढ़ने लगे।










