अरविंद केजरीवाल को आखिरकार टाइप-7 सरकारी बंगला आवंटित
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को अंततः 95 लोधी एस्टेट में स्थित टाइप-7 सरकारी बंगला आवंटित कर दिया गया है। इस आवंटन के लिए AAP को केंद्र सरकार के खिलाफ लंबी और कठिन कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी, जो कई महीनों तक चली।
2013 में किए गए वादे और सरकारी आवास का संघर्ष
साल 2013 की सर्दियों में, केजरीवाल और उनकी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में अप्रत्याशित सफलता हासिल की थी। उस समय केजरीवाल ने अपने चुनावी अभियान में यह वादा किया था कि जब तक वे मुख्यमंत्री रहेंगे, वे सरकारी बंगले या वाहन का उपयोग नहीं करेंगे। उस समय उन्होंने अपने सरल और जनता के प्रति समर्पित छवि को बनाए रखने के लिए अपने कार्यस्थल के रूप में कौशांबी, गाजियाबाद में अपनी पत्नी को आवंटित सरकारी अपार्टमेंट का ही उपयोग किया। यहां तक कि उन्होंने मेट्रो से यात्रा कर अपने कार्यालय तक पहुंचने का नाटकीय प्रदर्शन भी किया था।
2025 में हाई कोर्ट का फैसला और आवंटन प्रक्रिया
लेकिन समय के साथ स्थिति बदल गई। 2025 में, लगभग एक साल से दिल्ली की सत्ता से बाहर रहने के बाद, केजरीवाल पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में टाइप VIII सरकारी आवास के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में संघर्ष कर रहे थे। उनके वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि उन्हें टाइप VII या VIII का बंगला मिलना चाहिए, और टाइप V पर डाउनग्रेड नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें कोई विशेष प्राथमिकता नहीं चाहिए और वे किसी अन्य दल जैसे बसपा (BSP) की तरह नहीं हैं। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, अदालत ने अंततः केजरीवाल को टाइप 7 बंगला आवंटित करने का आदेश दिया।










