कोल्ड्रिफ कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला बढ़ रहा है
कोल्ड्रिफ (Coldrif) नामक कफ सिरप के सेवन से शिशुओं और बच्चों की जान जाने का सिलसिला लगातार जारी है। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और राजस्थान (Rajasthan) जैसे राज्यों में इस सिरप के कारण अब तक कई बच्चों ने अपनी जिंदगी गंवाई है। माता-पिता गहरे सदमे में हैं और हर दिन नई मौतों की खबरें सामने आ रही हैं।
बच्चों की जान पर बन आई दवाओं का कहर
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के कलमेश्वरा गांव में 8 सितम्बर को कैलाश यादव के तीन साल के बेटे कबीर की मौत हो गई। कैलाश ने अपने बच्चे को सर्दी और खांसी के इलाज के लिए 24 अगस्त को छिंदवाड़ा के परासिया के एक शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ प्रवीण सोनी के पास ले गए थे। डॉक्टर ने उसे कोल्ड्रिफ कफ सिरप सहित अन्य दवाइयां लिखीं। इन दवाओं का सेवन करने के बाद बच्चे की तबीयत और बिगड़ने लगी। इसके बाद उसे चार अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन 8 सितम्बर को उसकी मौत हो गई।
मामले की जांच और पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
कैलाश यादव ने बताया कि बच्चे को सर्दी खांसी हुई थी, जिसके इलाज के लिए वह डॉ प्रवीण सोनी के पास गया था। पहले कोल्ड्रिफ सिरप दिया गया, जिसके बाद बच्चे की हालत और खराब हो गई। बाद में उसे दूसरे क्लिनिक में भेजा गया, जहां डॉक्टर ने कहा कि बच्चे की किडनी धीरे-धीरे खराब हो रही है। परिवार ने चार अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका। कैलाश का आरोप है कि उसकी मौत का कारण कोल्ड्रिफ सिरप ही है।
मामले की गंभीरता और सरकार की कार्रवाई
कैलाश यादव ने जांच टीम को अपनी शिकायत में कहा कि उन्होंने बच्चे का इलाज कराने के लिए जमीन गिरवी रखी थी और साढ़े चार लाख रुपये का कर्ज लिया था। उनका कहना है कि सरकार को इस मामले में उचित मुआवजा देना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि 24 अगस्त को बच्चे को परासिया के डॉक्टर सोनी ने देखा था, और उसकी हालत बिगड़ने के बाद उसे नागपुर और बैतूल के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अंततः 8 सितम्बर को उसकी मौत हो गई।











