दिल्ली में वायु प्रदूषण नियंत्रण के नए नियम लागू
दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण को घटाने के उद्देश्य से निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों को कड़ा कर दिया है। अब सभी निर्माण स्थलों पर कम से कम 100 GSM मोटी हरी जालियों का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही, ‘डस्ट पोर्टल 2.0’ नामक डिजिटल निगरानी प्रणाली शुरू की जाएगी, जो निर्माण कार्यों की सतत निगरानी सुनिश्चित करेगी।
हरी जालियों की मोटाई और प्रदूषण रोकथाम में प्रभाव
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण स्थलों पर उपयोग होने वाली हरी जालियों की न्यूनतम मोटाई 100 GSM होनी चाहिए। पहले इस संबंध में कोई मानक तय नहीं था, लेकिन अब यह जरूरी कर दिया गया है कि जालियों की गुणवत्ता और मोटाई दोनों मानकों पर खरा उतरें। 100 GSM की जाली का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यह अत्यधिक घनी होती है, जो PM2.5 और PM10 जैसे खतरनाक सूक्ष्म कणों को हवा में फैलने से रोकने में प्रभावी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मानक से प्रदूषण नियंत्रण के उपाय अधिक प्रभावी और मापने योग्य बनेंगे।
प्रदूषण से लड़ने के लिए तकनीकी उपाय और निगरानी प्रणाली
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सरकार पूरी गंभीरता और तत्परता से काम कर रही है। वैज्ञानिक तकनीकों, सख्त निगरानी और प्रभावी उपायों के माध्यम से प्रदूषण का मुकाबला किया जा रहा है। सरकार ने पहले ही सभी निर्माण स्थलों के लिए ‘डस्ट पोर्टल’ पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है, और अब ‘डस्ट पोर्टल 2.0’ नामक नई डिजिटल प्रणाली लाने की योजना है। यह प्लेटफॉर्म निर्माण स्थलों की निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद करेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई आसान होगी।











