दिल्ली शराब नीति मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
दिल्ली की प्रसिद्ध शराब नीति से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। आम आदमी पार्टी के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और उनके सहयोगी दुर्गेश पाठक द्वारा अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला लिया है कि तीन अनुभवी वकीलों को एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त किया जाएगा।
अदालत का निर्देश और एमिकस क्यूरी का महत्व
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि वे सुनिश्चित करेंगी कि आरोपियों का पक्ष अदालत में रखा जाए, भले ही वे स्वयं पेश न हों। कोर्ट ने यह भी कहा कि शुक्रवार को एमिकस क्यूरी की नियुक्ति का औपचारिक आदेश पारित किया जाएगा, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। एमिकस क्यूरी का अर्थ है अदालत का मित्र, जो एक वरिष्ठ वकील होता है और कानूनी मुद्दों को स्पष्ट करने तथा निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त किया जाता है।
संबंधित घटनाक्रम और न्यायिक प्रक्रिया
20 अप्रैल को जस्टिस शर्मा ने अपने आप को इस मामले से अलग करने की याचिका को खारिज कर दिया था। इससे पहले, 27 फरवरी को एक ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था, यह कहते हुए कि अभियोजन पक्ष का मामला न्यायिक जांच में टिकने में असमर्थ है। इसके बाद 9 मार्च को हाई कोर्ट ने सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और ट्रायल कोर्ट के कुछ निष्कर्षों को त्रुटिपूर्ण बताया। आरोपियों ने जस्टिस शर्मा पर पक्षपात का आरोप भी लगाया था, लेकिन अदालत ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।









