विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का महत्व और विशेषताएँ
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो अपनी अनूठी तकनीक और ऐतिहासिक महत्व के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। यह घड़ी न केवल समय बताती है, बल्कि सूर्य उदय, ग्रहों की स्थिति, मुहूर्त, और पंचांग जैसी महत्वपूर्ण खगोलीय जानकारियों का भी संकेतक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में वाराणसी (Varanasi) के दौरे के दौरान इस घड़ी का निरीक्षण किया, जिससे इसकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई है।
देशभर में फैल रहा विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का प्रभाव
यह वैदिक घड़ी मध्यप्रदेश के उज्जैन (Ujjain) से शुरू होकर देश के अन्य धार्मिक स्थलों तक पहुंच रही है। खास बात यह है कि इसे काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देखा और इसकी कार्यप्रणाली को समझा। यह घड़ी कुछ महीनों पहले ही मुख्यमंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को भेंट की गई थी। इसके बाद इसे काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित किया गया।
किसने बनाई और कब स्थापित हुई?
यह अद्भुत वैदिक घड़ी मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग के अंतर्गत ‘महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन’ (Maharaja Vikramaditya Research Institute, Ujjain) के विद्वानों द्वारा विकसित की गई है। इसे 29 फरवरी 2024 को उज्जैन में प्रधानमंत्री मोदी ने लोकार्पण किया था। इसके बाद 3 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट किया, और 4 अप्रैल 2026 को इसे काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित कर दिया गया।









