मध्य प्रदेश में जंगली भैंस की पुनर्स्थापना का प्रयास
मध्य प्रदेश के वन क्षेत्र में लगभग एक सदी पहले विलुप्त हो चुकी जंगली भैंस की प्रजाति को फिर से जीवित करने का महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया गया है। असम के काजीरंगा (Kaziranga) नेशनल पार्क से कान्हा टाइगर रिजर्व तक इस प्रजाति का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया है। यह प्रयास देश के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्राकृतिक आवास में बदलाव के लिए विशेष रणनीति अपनाई गई
इस परियोजना में एक नर और तीन मादा जंगली भैंसें शामिल हैं, जिन्होंने लगभग 2000 किलोमीटर की दूरी तीन दिनों में तय की। इस दौरान पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों की टीम ने इन जानवरों की सेहत, भोजन और तनाव स्तर पर लगातार निगरानी रखी। कान्हा पहुंचने के बाद इन जानवरों को सीधे जंगल में नहीं छोड़ा गया, बल्कि उन्हें विशेष रूप से तैयार किए गए बाड़ों में रखा गया है। इस कदम का उद्देश्य है कि जानवर धीरे-धीरे नए पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र में ढल सकें।
भविष्य की योजना और पर्यावरणीय सहयोग
इस अभियान का मुख्य लक्ष्य लगभग 50 जंगली भैंसों को स्थानांतरित करना है, ताकि कान्हा में इनकी स्थिर और स्वस्थ प्रजनन आबादी विकसित हो सके। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद ही इस स्थान का चयन किया गया है। यह परियोजना न केवल प्रजाति के संरक्षण का प्रयास है, बल्कि दो राज्यों के बीच पर्यावरणीय सहयोग का भी प्रतीक है। मध्य प्रदेश ने असम को घड़ियाल (Gharial) उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी दिया है, ताकि दोनों राज्यों में वन्यजीव संरक्षण के प्रयास मजबूत हो सकें। विशेषज्ञ मानते हैं कि जंगली भैंसों का चरना घास के मैदानों की विविधता बनाए रखने में मदद करता है, जो मध्य भारत के पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।









