बिहार में महिलाओं के मुद्दे पर राजनीतिक टकराव तेज
बिहार में महिलाओं के कल्याण का विषय अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन चुका है। विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और पूर्व मंत्री श्रेयसी सिंह के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस देखने को मिली है। तेजस्वी ने एनडीए सरकार पर महिलाओं के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है, जबकि श्रेयसी सिंह ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार की मजबूत नीतियों ने महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद की है।
तेजस्वी यादव का आरोप: महिलाओं के साथ धोखाधड़ी और आर्थिक नुकसान
तेजस्वी यादव ने कठोर शब्दों में कहा कि एनडीए सरकार ने झूठे वादों के माध्यम से महिलाओं को भ्रमित किया और उनकी भावनाओं का चुनावी लाभ उठाया। उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान महिलाओं और जीविका दीदियों के खातों में पैसे डालकर वोट प्रभावित करने का प्रयास किया गया, साथ ही धमकियां भी दी गईं कि यदि किसी ने किसी खास पार्टी को वोट नहीं दिया, तो उनके पैसे वापस लिए जा सकते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिलाओं को दो लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता का वादा किया गया था, लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी न तो पहली किस्त मिली है और न ही दूसरी। तेजस्वी ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि खजाना लगभग खाली है और चुनावी खर्च ने बिहार को गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया है।
विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के आरोपों पर पूर्व मंत्री श्रेयसी सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और एनडीए सरकार ने महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि आज बिहार में महिलाएं न केवल अधिक सुरक्षित हैं, बल्कि शासन और कानून व्यवस्था में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
श्रेया सिंह ने स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण, पुलिस बल में 35 प्रतिशत आरक्षण और स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने जैसे कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे प्रदेश में महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं। साथ ही, उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उनके पास कोई मजबूत मुद्दा नहीं है, इसलिए वे भ्रामक जानकारी फैलाकर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।










