उज्जैन में संन्यास विवाद का नया मोड़
उज्जैन में संन्यास को लेकर उठे विवाद ने अब एक नई दिशा ले ली है। स्वामी हर्षानंद गिरि, जिन्हें पहले हर्षा रिछारिया के नाम से जाना जाता था, ने अपने ऊपर लगे आरोपों का खुलकर जवाब देते हुए एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में उन्होंने न केवल सभी आरोपों को खारिज किया, बल्कि आरोप लगाने वालों को सीधी चुनौती भी दी है।
आरोपों का खंडन और चुनौती
हर्षानंद गिरि ने कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में से एक भी साबित हो जाता है, तो वे अपनी सारी संपत्ति समर्पित कर देंगे। वहीं, यदि सभी आरोप झूठे साबित होते हैं, तो वे आरोप लगाने वालों के खिलाफ एक करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दर्ज करेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपनी बैंक डिटेल्स सार्वजनिक करने को तैयार हैं, ताकि किसी भी आर्थिक आरोप की सच्चाई सामने आ सके।
संन्यास का विवाद और सामाजिक प्रतिक्रिया
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब भोपाल की निवासी हर्षा रिछारिया ने अपना पिंडदान कर संन्यास ग्रहण किया और सनातन धर्म को फिर से अपनाने की घोषणा की। उन्हें उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में सुमनानंदजी महाराज द्वारा दीक्षा दी गई, जिसके बाद वे स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाने लगीं।
हालांकि, उनके इस संन्यास को संत समाज के एक वर्ग ने स्वीकार नहीं किया। मध्य प्रदेश के संत समिति के अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने उनके संन्यास पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि संन्यास कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह वर्षों की तपस्या, अनुशासन और साधना का परिणाम होता है। ऐसे में बार-बार संन्यास लेने जैसी घटनाएं सनातन परंपराओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण के पीछे विदेशी फंडिंग का हाथ हो सकता है और इसे प्रचार पाने के उद्देश्य से किया गया कदम माना जा रहा है। उन्होंने अखाड़ा परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि परंपराओं में किसी तरह की छेड़छाड़ न हो।
वहीं, हर्षानंद गिरि ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है और कहा है कि वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि वे सनातन धर्म और उसकी परंपराओं का पूरी श्रद्धा के साथ पालन कर रहे हैं, और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप केवल उनकी छवि खराब करने का प्रयास हैं।
गौरतलब है कि हर्षा रिछारिया प्रयागराज महाकुंभ के दौरान चर्चा में आई थीं और तब से वे लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। अब यह विवाद किस दिशा में बढ़ता है, यह देखने वाली बात होगी।









