मध्य प्रदेश में हिरासत में मौतों का सिलसिला चिंता का विषय
मध्य प्रदेश में लगातार हो रही हिरासत में मौतों ने राज्य की कानून व्यवस्था और पुलिस की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छतरपुर जिले में हाल ही में दो संदिग्ध मौतें सामने आई हैं, जिन्होंने इस मुद्दे को फिर से चर्चा का केंद्र बना दिया है। इन घटनाओं के बावजूद कार्रवाई तो हुई है, लेकिन मृतकों के परिवारों को अभी भी न्याय की उम्मीद अधूरी ही लग रही है।
संबंधित घटनाओं का विस्तार और पुलिस की भूमिका
इन घटनाओं की गंभीरता को दर्शाने वाला एक दर्दनाक दृश्य अस्पताल का वह दृश्य है, जहां एक मां की चीखें हर किसी को झकझोर देती हैं। उसकी 23 वर्षीय बेटी रामविशाल अहिरवार, जो चंदला थाना क्षेत्र के नाहरपुर गांव की निवासी थी, अब इस दुनिया में नहीं है। उसे पत्नी के साथ हुए विवाद के बाद थाने बुलाया गया था, जहां समझौते की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान रामविशाल ने जहरीला पदार्थ खा लिया। उसकी हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। पीड़ित मां का आरोप है कि पुलिस ने बेटे के साथ मारपीट की और उसे प्रताड़ित किया, जिसके कारण उसने यह कदम उठाया।
पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक जांच का हाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए छतरपुर के पुलिस अधीक्षक ने चंदला थाना प्रभारी को तत्काल निलंबित कर दिया है। यह घटना अकेली नहीं है, इससे पहले भी जिले में एक और संदिग्ध मौत का मामला सामने आया था। करीब एक सप्ताह पहले 45 वर्षीय सुरेंद्र सिंह को गुंडा परेड के लिए थाने बुलाया गया था, जिसके बाद वह बेसुध हालत में मिला। अस्पताल ले जाने पर उसकी हालत गंभीर होने पर ग्वालियर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि पुलिस यातना के कारण उसकी मौत हुई है। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ये घटनाएं सिर्फ संयोग हैं या फिर एक पैटर्न बनते जा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में मध्य प्रदेश में कुल 46 लोगों की मौत पुलिस हिरासत में हुई है।










