इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम को लेकर विवाद
इंदौर नगर निगम के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन को लेकर तीव्र विवाद शुरू हो गया। कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने इस्लामी मान्यताओं का हवाला देते हुए गीत गाने से इनकार कर दिया और इसे अपमानित करने वाले तर्क प्रस्तुत किए। इसके परिणामस्वरूप, उन्हें एक दिन के लिए सदन से निष्कासित कर दिया गया। इस बीच वार्ड-39 की पार्षद रुबीना इकबाल खान ने अपने उग्र रुख के साथ कहा कि “किसी के बाप में दम नहीं कि हमसे वंदे मातरम कहलवा ले।”
रुबीना खान का विवादित बयान और पार्टी लाइन से हटकर टिप्पणी
सदन की कार्यवाही रुकने के बाद, रुबीना ने मीडिया के सामने पार्टी लाइन से हटकर कई विवादित बयान दिए। उन्होंने कहा, “भाड़ में जाए कांग्रेस, हम कांग्रेस से नहीं हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समुदाय का अस्तित्व बना रहेगा, क्योंकि वे कब्रों में दफन होंगे, जबकि हिंदुओं की अस्थियां गंगा के साथ बहकर अरब सागर में मिल जाएंगी। रुबीना ने यह भी कहा कि कांग्रेस मुसलमानों के बिना शून्य है और यदि उन्हें निशाना बनाया गया, तो वे AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) में चले जाएंगे।”
कांग्रेस और बीजेपी के बीच बढ़ती टकराव की स्थिति
शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने रुबीना खान के बयानों को पार्टी विरोधी मानते हुए उनके निष्कासन का प्रस्ताव प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेज दिया है। चौकसे ने घोषणा की है कि अब इंदौर में कांग्रेस के हर कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ और समापन ‘जन गण मन’ से होगा। यदि किसी को आपत्ति हो, तो वह बैठक में न आए। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने रुबीना पर कार्रवाई का समर्थन किया है, जबकि डॉ. अमीनुल खान सुरी ने चौकसे को ‘तानाशाह’ करार देते हुए उनका विरोध किया है।
वहीं, प्रदेश स्तर पर भाजपा ने इस विवाद को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यदि कांग्रेस अपने पार्षद पर कार्रवाई नहीं कर सकती, तो उसे आत्ममंथन करना चाहिए। भाजपा नेताओं का कहना है कि उन्हें बीजेपी से देशभक्ति का सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। इंदौर के सभी 85 वार्डों में विरोध प्रदर्शन कर भाजपा कार्यकर्ताओं ने रुबीना खान और फौजिया शेख के पुतले फूंके। निगम अध्यक्ष मुन्नालाल यादव ने संभागायुक्त को पत्र लिखकर दोनों पार्षदों पर FIR दर्ज करने और उन्हें पद से हटाने की मांग की है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी इस मामले में स्पष्ट स्टैंड लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रतीकों का अपमान करने का अधिकार किसी को नहीं है, और इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।









