ग्वालियर में विकास कार्यों का भूमिपूजन विवाद
मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में विकास परियोजनाओं के शुभारंभ के दौरान एक अनूठी स्थिति देखने को मिली। क्षेत्रीय विधायक और कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा जब वार्ड-52 में भूमिपूजन के लिए पहुंचे, तो वहां नगर निगम के कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं थे। इस अप्रत्याशित स्थिति ने मंत्री का गुस्सा भड़काया।
मंत्री का आक्रोश और अधिकारियों की गैरमौजूदगी
मंत्री ने मंच पर खाली कुर्सियों को देखकर अपना गुस्सा जाहिर किया और तुरंत ही नगर निगम आयुक्त संघप्रिय (IAS) को फोन कर कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, “कार्यपालन यंत्री सुशील कटारे ने स्वयं कार्यक्रम का आयोजन किया था, लेकिन वह भी गायब हैं। पीएचई विभाग के यंत्री और उपयंत्री भी नहीं आए हैं। यहां सिर्फ एक पंप ऑपरेटर खड़ा है। क्या मंत्री स्तर के व्यक्ति की इतनी अवहेलना संभव है?” साथ ही उन्होंने जेडओ सौरभ शाक्य को तुरंत हटाने की मांग की, क्योंकि उन्हें बदमाश करार देते हुए कहा, “मैंने दो साल पहले भी उसे हटाने का निर्देश दिया था।”
आरोप और कार्रवाई का त्वरित असर
जब नगर निगम कमिश्नर संघप्रिय ने इस मामले में चर्चा करने का प्रस्ताव रखा, तो मंत्री नाराज हो गए और कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “बात करने से काम नहीं चलेगा, यदि आप काम नहीं कर सकते तो मुझे बताएं, मैं आपसे बात करना बंद कर दूंगा। तुरंत कार्रवाई करें।” कुछ ही घंटों में ही मंत्री की नाराजगी का असर दिखा और निगम आयुक्त ने आदेश जारी कर जेडओ सौरभ शाक्य को सस्पेंड कर दिया। इस कार्रवाई के पीछे पुरानी शिकायतें और प्रोटोकॉल उल्लंघनों के तीन गंभीर आरोप बताए गए हैं। अब उनकी जगह बृजेश राजपूत को नई जिम्मेदारी दी गई है।










