सप्तदेव क्षेत्र में 21 दिवसीय महायज्ञ का भव्य समापन
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित प्राचीन सप्त ऋषियों की तपोभूमि, सातदेव क्षेत्र, में एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का समापन हुआ। इस आयोजन का नेतृत्व संत शिवानंद महाराज ने किया, जिसमें पूरे क्षेत्र में भव्यता का माहौल बना रहा। 21 दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन, श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा का 11 हजार लीटर दूध से अभिषेक किया। इस जलाभिषेक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का प्रतीक है।
महायज्ञ की विशेषताएं और धार्मिक अनुष्ठान
इस आयोजन में प्रतिदिन 21 क्विंटल हवन सामग्री का उपयोग कर महाहवन किया गया। पूरे 21 दिनों में लगभग 41 टन हवन सामग्री, जड़ी-बूटियों के साथ सोना-चांदी की आहुतियां भी दी गईं। श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर पर नारियल अर्पित कर अपने पुण्य लाभ को बढ़ाया। आयोजन के अंतिम दिन विशाल भंडारे का भी आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण कर अपने धार्मिक कर्तव्य की पूर्ति की।
सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व का आयोजन
संत शिवानंद महाराज द्वारा आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के लिए करीब पांच एकड़ क्षेत्र में विशाल पंडाल का निर्माण किया गया था। इस दौरान घंटियों की मधुर आवाज और दीपों की जगमगाहट ने पूरे भेरूंदा क्षेत्र को भक्ति के रंग में रंग दिया। सातदेव क्षेत्र को प्राचीन काल से सप्त ऋषियों की तपोभूमि माना जाता है, जहां ब्रह्माजी के मानस पुत्रों ने कठोर तपस्या की थी। इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव पातालेश्वर महादेव के रूप में प्रकट हुए। ऐतिहासिक दृष्टि से यह क्षेत्र गोंड शासकों के अधीन रहा और बाद में अहिल्याबाई होल्कर ने यहां धार्मिक स्थलों का निर्माण कराया, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और भी बढ़ गई।










