बिहार में सत्ता परिवर्तन की पूरी योजना स्पष्ट
बिहार में सरकार के बदलाव की प्रक्रिया पहले ही पूरी तरह से तय कर ली गई है। यह योजना बिल्कुल फिल्मी स्क्रिप्ट की तरह तैयार की गई है, जिसमें हर कदम, हर तारीख और हर स्थान पहले से निर्धारित है। केवल खरमास समाप्त होने का इंतजार है, जिसके बाद 10 से 15 अप्रैल के बीच पूरी राजनीतिक तस्वीर साफ हो जाएगी।
भाजपा की ओर से अक्सर आश्चर्यचकित करने वाले निर्णय लिए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार बिहार में ऐसा होने की संभावना कम ही दिखती है। मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और विभागों का बंटवारा भी लगभग तय हो चुका है। फिलहाल भाजपा की ओर से कोई ऐसी स्थिति नहीं बन रही है, जो जेडीयू नेताओं और कार्यकर्ताओं को परेशान कर सके।
नीतीश कुमार की विरासत और उत्तराधिकारी का फैसला
नीतीश कुमार की सरकार में नींव तब ही रख दी गई थी, जब विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बनी थी। उन्होंने गृह विभाग छोड़कर जो संकेत दिए थे, उन्हें बार-बार समृद्धि यात्रा के दौरान भी दोहराया गया। यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए में लौटने के बाद उन्होंने कहा था कि वे आगे कहीं नहीं जाएंगे।
उनके उत्तराधिकारी का फैसला पहले ही हो चुका था, और अब उस पर अमल करने की प्रक्रिया चल रही है। नीतीश कुमार का मानना है कि सत्ता का वारिस बेटा ही होगा, जैसा कि लालू यादव ने अपने समय में कहा था। हालांकि, यह पूरी तरह से नहीं है, क्योंकि निशांत कुमार अकेले उत्तराधिकारी नहीं हैं। उनके साथ ही सुशासन की विरासत का एक हिस्सा भाजपा के खाते में भी जाएगा, और उन्हें डिप्टी सीएम बनाकर सरकार में भागीदारी दी जाएगी।
आगामी नेतृत्व और संभावित बदलाव
सूत्रों के अनुसार, निशांत कुमार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद कर रहे हैं। यह संकेत है कि वे पार्टी के नए नेता के रूप में स्वीकार किए जाएंगे, जबकि नीतीश कुमार पार्टी का मार्गदर्शन जारी रखेंगे। उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है।
समृद्धि यात्रा के दौरान नीतीश कुमार ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में सम्राट चौधरी का संकेत दिया था। 12 मार्च को पूर्णिया में उन्होंने मंच से कहा कि अब उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का जिम्मा इसी नेता का होगा। इसी तरह, 24 मार्च को रोहतास में भी उन्होंने सम्राट चौधरी के समर्थन में संकेत दिए।
इन सब संकेतों के बीच, बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो चुकी है। खरमास के बाद 15 से 20 अप्रैल के बीच नई सरकार का कार्यभार संभालने की संभावना है, और नीतीश कुमार पटना में अपने मार्गदर्शक मंडल से दिशा-निर्देश देते रहेंगे।









