दिल्ली हाईकोर्ट में केजरीवाल की जज बदलने की मांग
दिल्ली हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से अपने मामले से अलग होने की अपील की है। इस याचिका पर सुनवाई 13 अप्रैल को निर्धारित की गई है। वहीं, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मांग का विरोध किया है और इस मामले की सुनवाई के लिए तैयार नहीं है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की इस याचिका का कड़ा विरोध किया है।
CBI का कमजोर मामला और हाईकोर्ट का फैसला
27 फरवरी को निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि CBI का केस बहुत कमजोर है और उसमें कोई दम नहीं है। इस कारण उसने सभी 23 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया, जिसमें केजरीवाल भी शामिल हैं। अदालत ने CBI को भी फटकार लगाई थी। इसके बाद, CBI ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया। मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के पास पहुंचा, जिन्होंने 9 मार्च को कहा कि निचली अदालत के कुछ फैसले गलत प्रतीत होते हैं। उन्होंने यह भी आदेश दिया कि जांच अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे केजरीवाल समर्थकों को लगा कि जज उनके पक्ष में नहीं हैं।
केजरीवाल की जज बदलने की मांग और आगे की कार्रवाई
11 मार्च को केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य ने हाईकोर्ट के मुख्य जज से अनुरोध किया कि इस मामले की सुनवाई किसी दूसरे जज से कराई जाए। लेकिन मुख्य जज ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला जस्टिस शर्मा को ही लेना होगा। इसके बाद, केजरीवाल ने खुद हाईकोर्ट पहुंचकर अपनी याचिका दाखिल की। इस पर CBI के वकील तुषार मेहता ने कड़ा विरोध जताया और कहा कि यह याचिका बेकार है और अदालत का अपमान है। जस्टिस शर्मा ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया और कहा कि 13 अप्रैल को इस पर सुनवाई होगी।
मामला अभी भी कोर्ट में है, जहां केजरीवाल चाहते हैं कि इस केस की सुनवाई कर रहे जज को बदल दिया जाए। 13 अप्रैल को ही तय होगा कि जस्टिस शर्मा इस केस में बनी रहती हैं या नहीं।










