आम आदमी पार्टी में राघव चड्ढा के खिलाफ बढ़ती आंतरिक खींचतान
आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर कलह की परंपरा फिर से जीवित हो उठी है, जिसमें राघव चड्ढा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। यह विवाद उस समय और तेज हो गया जब दो साल पहले स्वाति मालीवाल के साथ हुए विवाद जैसी स्थिति फिर से उत्पन्न हो गई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच राघव के साथ व्यवहार में तल्खी साफ नजर आ रही है। पहले उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया, और फिर खबरें आईं कि उन्हें पार्टी से sidelines कर दिया गया है। आज सुबह दोनों पक्षों के बीच खुलकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया, जिसमें राघव भी स्वाति मालीवाल की तरह खुद को ‘आप नेता’ कहकर विद्रोह का सुर अपना रहे हैं। यह स्थिति पार्टी के लिए एक और ‘स्वाति मालीवाल’ जैसी चुनौती बन गई है।
राघव चड्ढा के खिलाफ पार्टी का कठोर कदम और उनका जवाब
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने राघव चड्ढा के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर उन्हें सदन में बोलने से रोकने का निर्देश दिया है। राघव ने इस फैसले के विरोध में एक वीडियो जारी कर पूछा है, “क्या जनता के मुद्दे उठाना कोई अपराध है? क्या मैंने कोई गुनाह किया है?” उनके इस सवाल ने पार्टी के भीतर चल रही असमंजस की स्थिति को उजागर किया है। वहीं, पार्टी के मीडिया प्रमुख अनुराग ढांडा ने राघव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डरने का आरोप लगाते हुए कहा कि संसद में बोलने का मौका मिलना ही बहुत है, और उसमें या तो देश की रक्षा का संघर्ष कर सकते हैं या फिर एयरपोर्ट की कैंटीन में सस्ते समोसे का आनंद ले सकते हैं।
पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और राघव का मजबूत जवाब
राघव चड्ढा ने अपने समर्थन में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझो। मुझे खामोश करवाया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूं।” उन्होंने अपने खिलाफ उठाए गए कदमों को चुनौती देते हुए कहा कि वे देश के मुद्दों को उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। राघव ने अपने वीडियो में एयरपोर्ट पर महंगे खाने, डिलीवरी राइडर्स की समस्याओं, खाने में मिलावट, टोल प्लाजा लूट, बैंक चार्ज, टैक्स बोझ और टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी जैसे मुद्दों को उठाया है। उनका मानना है कि इन मुद्दों को उठाने के कारण ही उन्हें पार्टी से दूर किया गया है, लेकिन वे अपने संघर्ष में डटे रहेंगे।











