मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में मंदिर का गर्भगृह खाली होने का चौंकाने वाला मामला
राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में स्थित जगन्नाथ मंदिर का गर्भगृह अचानक खाली होने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। सुबह जब मंदिर के कपाट खुले, तो श्रद्धालुओं का हृदय दहल उठा, क्योंकि भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की मूर्तियां वहां मौजूद नहीं थीं। यह दृश्य देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया, मानो आस्था का केंद्र ही सूना हो गया हो।
डॉ. एस. प्रसाद जब रोजाना की तरह पूजा करने पहुंचे, तो उन्हें भी मंदिर में मूर्तियां नहीं मिलीं। इस घटना ने पूरे श्रद्धालु समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया। प्रसाद का रोते हुए वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उनकी आंखों से आंसू रुक नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान कहां चले गए, यह सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है।
मंदिर पुजारी की धमकियों और प्रताड़ना का खुलासा
मंदिर के पुजारी विष्णुदास को राधेश्याम सेन और जीतू सोनी द्वारा धमकियां दी गई थीं, जबकि मंदिर के अन्य कर्मचारी जैसे भंवरलाल दांगी पर भी मारपीट के आरोप लगे हैं। इन घटनाओं की शिकायत थाने में दर्ज कराई गई थी, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। विष्णुदास का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उनकी आवाज टूट रही है और दर्द स्पष्ट झलक रहा है।
स्थिति बिगड़ने के बाद, पुजारी मंदिर छोड़कर चले गए और अपने साथ भगवान की मूर्तियां भी ले गए। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें प्रताड़ित किया गया और मंदिर में रहना उनके लिए असंभव हो गया था। इस पूरे घटनाक्रम में, डॉ. एस. प्रसाद की सिसकियां भी आस्था के टूटने का संकेत दे रही हैं। 2021 में वृंदावन से भगवान की प्रतिमाएं लाकर मंदिर में स्थापित की गई थीं, और तभी से विष्णुदास सेवा में लगे थे। लेकिन अब, वे भी मंदिर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया
खिलचीपुर थाना प्रभारी उमाशंकर मुकाती ने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस की टीम वृंदावन (Vrindavan) रवाना हो रही है ताकि पुजारी और भगवान की प्रतिमाओं को सम्मानपूर्वक वापस लाया जा सके और मंदिर में पुनः स्थापित किया जा सके। साथ ही, पुजारी को पूरी सुरक्षा का आश्वासन भी दिया गया है।
यह घटना पूरे क्षेत्र में आक्रोश और चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या अब भगवान भी सुरक्षित नहीं हैं। आस्था और विश्वास पर मंडराते इस संकट के बीच, सवाल उठ रहे हैं कि कब तक यह डर और दबाव के साये में आस्था सिसकती रहेगी।
पिछले पांच वर्षों से मंदिर में सेवा कर रहे विष्णुदास की कहानी भी इसी दर्द को दर्शाती है। लगातार धमकियों और प्रताड़नाओं के कारण, वे मंदिर छोड़ने को मजबूर हो गए और अपने साथ भगवान की मूर्तियां भी ले गए, मानो अपनी पीड़ा और विश्वास को साथ ही ले गए हों।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर में असामाजिक तत्वों का कब्जा हो रहा था, जहां गांजा पीना, जमावड़ा लगाना और जमीन पर कब्जा करने की कोशिशें आम हो गई थीं। इन तत्वों का दबाव और धमकियां मंदिर के पुजारी पर भी बढ़ती जा रही थीं, जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी।










