मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज
मध्य प्रदेश की राजनीति में आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले नई जटिलताएँ उत्पन्न हो गई हैं। कांग्रेस के विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से अस्थायी राहत मिल गई है, जिसने उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा दी है। हालांकि, इस राहत के साथ ही एक महत्वपूर्ण शर्त भी जुड़ी है, जिसके अनुसार वह विधायक रहते हुए भी राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे।
राज्यसभा चुनाव की स्थिति और कांग्रेस की रणनीति
राज्यसभा के लिए मतदान जून में निर्धारित है, जिसमें मध्य प्रदेश की तीन सीटों पर चुनाव होना है। इस स्थिति में मल्होत्रा का वोट न डाल पाना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वर्तमान में कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं, लेकिन मल्होत्रा के मतदान से बाहर होने के बाद यह संख्या घटकर 64 रह जाती है। इससे कांग्रेस की चुनावी ताकत प्रभावित हो सकती है।
विधायकों की संख्या और क्रॉस वोटिंग का खतरा
मध्य प्रदेश में एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। कांग्रेस के पास अभी भी इस आंकड़े से ऊपर समर्थन है, लेकिन यदि क्रॉस वोटिंग की आशंका बढ़ती है, तो मुकाबला कठिन हो सकता है। बीना से विधायक निर्मला सप्रे के रुख को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएँ तेज हैं, क्योंकि वह लगातार बीजेपी के मंचों पर नजर आ रही हैं। वहीं, भारतीय आदिवासी पार्टी के कमलेश्वर डोडियार का समर्थन भी स्पष्ट नहीं है।
वहीं, राज्य में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जो दो सीटें आसानी से जीतने के लिए पर्याप्त हैं। यदि भाजपा तीसरी सीट के लिए भी उम्मीदवार उतारती है, तो मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है। इस तरह, दोनों प्रमुख दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा की संभावना बनी हुई है।











