मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का प्रभाव रेलवे रसोई तक पहुंचा
मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण भारत में एलपीजी गैस की आपूर्ति में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। इस स्थिति का असर अब रेलवे की खानपान सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) ने अपने स्टेशनों पर मौजूद रसोईघरों में गैस के बजाय इंडक्शन और माइक्रोवेव ओवन का उपयोग करने का निर्देश जारी किया है।
रेलवे स्टेशनों पर गैस संकट और नई व्यवस्था की चुनौतियां
फूड प्लाजा संचालकों का कहना है कि यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए केवल बिजली आधारित उपकरणों से भोजन की आपूर्ति संभव नहीं है। दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग के सबसे व्यस्त स्टेशन पंडित दीनदयाल उपाध्याय (DDU) जंक्शन पर आईआरसीटीसी के रेस्टोरेंट में अभी भी गैस सिलेंडर से खाना पकाया जा रहा है। मैनेजर संदीप यादव ने बताया कि उन्हें दो दिन पहले ही नए उपकरणों के इस्तेमाल का निर्देश मिला है, लेकिन पुराने स्टॉक के कारण अभी भी गैस का प्रयोग हो रहा है। जल्द ही यह स्टॉक समाप्त हो जाएगा और नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
बड़ी चुनौतियों के बीच यात्रियों की भोजन व्यवस्था
यात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था करना एक बड़ा सवाल बना हुआ है। गैस की तुलना में इंडक्शन और माइक्रोवेव में खाना बनाने में समय और क्षमता की सीमाएं हैं। संचालकों का मानना है कि यदि गैस संकट बना रहा, तो इससे यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं और भोजन की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। रेलवे प्रशासन इस वैकल्पिक व्यवस्था को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसकी सफलता को लेकर आशंकाएं भी जताई जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में चारबाग रेलवे स्टेशन पर भी इसी तरह की स्थिति देखी गई है। यहां के रेस्टोरेंट में इंडक्शन और गैस दोनों का इस्तेमाल हो रहा है। रेस्टोरेंट के मैनेजर ने बताया कि रोजाना करीब 1000 यात्री यहां भोजन करते हैं और फिलहाल गैस की कोई समस्या नहीं है। हालांकि, यात्री का कहना है कि लंबे समय तक इंडक्शन पर खाना बनाना संभव नहीं है, और गैस पर ही भोजन अधिक सुविधाजनक और प्रभावी है।









