भारतीय विदेश मंत्री की ईरान के साथ महत्वपूर्ण बातचीत
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से चर्चा की और वेस्ट एशिया की वर्तमान स्थिति पर विचार-विमर्श किया। यह उनकी तीसरी बातचीत थी, जब से 28 फरवरी को अमेरिका (US) और इज़रायल (Israel) ने ईरान (Iran) पर हमला किया था, जिसके बाद क्षेत्र के कई देशों ने जवाबी कार्रवाई की।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि आज शाम को ईरान के विदेश मंत्री के साथ चल रहे संघर्ष के नवीनतम घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने संपर्क में रहने पर सहमति व्यक्त की।
मंत्रियों के बीच पहले भी हुई है बातचीत
यह दोनों नेताओं के बीच तीसरी बार संवाद था। इससे पहले 28 फरवरी और 5 मार्च को दोनों ने बातचीत की थी। साथ ही, एस जयशंकर ने मंगलवार को अपने जर्मन (Germany) और दक्षिण कोरियाई (South Korea) समकक्षों से भी बात की, क्योंकि नई दिल्ली वेस्ट एशिया संकट और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रही है।
भारत की स्थिति और क्षेत्रीय तनाव पर भारत का रुख
संसद में सोमवार को अपने भाषण में जयशंकर ने कहा कि ईरान के साथ संपर्क बनाना फिलहाल नेतृत्व स्तर पर कठिन है। उन्होंने बताया कि वेस्ट एशिया में संघर्ष के दौरान ईरान में कई नेताओं की मौत हुई है। भारत सरकार का मानना है कि दिल्ली शांति और बातचीत की दिशा में लौटने का समर्थन करती है। साथ ही, भारत की प्राथमिकता भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा है।
जयशंकर ने यह भी बताया कि लड़ाई शुरू होने के बाद से लगभग 67,000 भारतीय नागरिक युद्धग्रस्त क्षेत्र से वापस लौट चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 28 फरवरी को ईरानी पक्ष ने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर डॉक करने की अनुमति मांगी थी, जिसे 1 मार्च को स्वीकृति दी गई।











