भविष्य की वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना
नई दिल्ली में आयोजित ‘रायसीना डायलॉग 2026’ में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने विश्व के बदलते समीकरणों पर स्पष्ट राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 1945 और 1989 की वैश्विक व्यवस्था को स्थायी रूप से बनाए रखना संभव नहीं है। वर्तमान में विश्व में शक्ति का वितरण और प्रभाव क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, जिससे नई अंतरराष्ट्रीय रणनीतियों का उदय हो रहा है।
मल्टीपोलर विश्व व्यवस्था और शक्ति का विकेंद्रीकरण
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में विश्व अधिक ‘मल्टीपोलर’ होने वाला है। उनके अनुसार, कोई भी देश अब पूरी तरह से सभी क्षेत्रों में प्रभुत्व नहीं स्थापित कर सकता। शक्ति अब विभिन्न आयामों में फैल चुकी है और अलग-अलग देशों की क्षमताएं विशिष्ट डोमेन में अधिक प्रभावशाली हो रही हैं। इस बदलाव के साथ ही वैश्विक शक्ति का केंद्रबिंदु भी स्थानांतरित हो रहा है, जहां क्षमताओं का वितरण अधिक विविध और विकेंद्रीकृत हो रहा है।
अमेरिका और नई विश्व व्यवस्था पर विश्लेषण
विदेश मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि वर्तमान समय में अधिकांश विश्लेषण अमेरिका में हो रहे बदलावों पर केंद्रित है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विश्व को उन ताकतों को समझना चाहिए जो इस परिवर्तन को प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक ढांचे में बदलाव को स्वीकार करना ही प्रगति का मार्ग है। भारत इस नई और उभरती हुई विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है, जहां शक्ति का विकेंद्रीकरण हो चुका है।
मध्य पूर्व की स्थिति पर भारत के रुख और रणनीति
कोलकाता में आयोजित ‘सागर संकल्प’ मैरीटाइम कॉन्क्लेव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले समुद्र को केवल व्यापार का माध्यम माना जाता था, लेकिन अब यह रणनीतिक दबदबे का केंद्र बन चुका है। वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों के बीच पुरानी सोच और मान्यताएं टूट रही हैं, और इन अनिश्चितताओं को समझना जरूरी है।
मध्य पूर्व के वर्तमान हालात और भारत की प्रतिक्रिया
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि मिडिल ईस्ट की वर्तमान स्थिति बहुत ही जटिल और असामान्य है। वहां जो घटनाएं हो रही हैं, उनसे भविष्य का अनुमान लगाना कठिन हो गया है। यह क्षेत्र न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है, और भारत को इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बनानी होगी।
भविष्य की चुनौतियों और भारत की भूमिका
रक्षा मंत्री ने कहा कि हमें इन अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। मिडिल ईस्ट के हालात का विश्लेषण करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने होंगे, ताकि क्षेत्र में स्थिरता और विकास सुनिश्चित किया जा सके।









