हरियाणा में 590 करोड़ का बैंक घोटाला उजागर
हरियाणा में IDFC First Bank से जुड़ा लगभग 590 करोड़ रुपये का बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसने राजनीतिक और जांच एजेंसियों दोनों को हिला कर रख दिया है। इस घोटाले के खुलासे के बाद देर रात विजिलेंस विभाग ने मास्टरमाइंड सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सरकार का दावा है कि इस रकम को वापस प्राप्त कर लिया गया है, लेकिन अभी भी कई सवालों के जवाब बाकी हैं। आखिर यह धोखाधड़ी कैसे हुई और इसमें कौन-कौन शामिल थे, यह जानना जरूरी हो गया है।
घोटाले का खुलासा और जांच की प्रक्रिया
यह मामला फरवरी 2026 के आसपास शुरू हुआ, जब हरियाणा सरकार ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी कामकाज से हटा दिया। विभागों को निर्देशित किया गया कि वे इन बैंकों में जमा अपने फंड को तुरंत दूसरे अधिकृत बैंकों में स्थानांतरित करें। जैसे ही एक विभाग ने चंडीगढ़ स्थित बैंक शाखा से अपना खाता बंद करने और धनराशि ट्रांसफर करने का अनुरोध किया, असली खेल शुरू हुआ। जांच में पता चला कि खातों में दिख रही रकम और वास्तविक बैलेंस में भारी अंतर था। प्रारंभिक जांच में करीब 490 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई, जो बाद में बढ़कर लगभग 590 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
धोखाधड़ी का तरीका और मुख्य आरोपी
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई हाई-टेक साइबर फ्रॉड नहीं था, बल्कि पारंपरिक तरीकों से किया गया एक बड़ा धोखाधड़ी का खेल था। आरोप है कि बैंक के कुछ कर्मचारियों ने बाहरी व्यक्तियों के साथ मिलकर फर्जी चेक और अनधिकृत ट्रांजेक्शन के माध्यम से सरकारी खातों से पैसा निकालकर अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया। इस साजिश में फर्जी कंपनियों का भी इस्तेमाल किया गया, ताकि ट्रेल को छिपाया जा सके। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड रिभव ऋषि था, जो पहले IDFC First Bank में मैनेजर रह चुका है और बाद में AU Small Finance Bank में तैनात था।










