दिल्ली में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन का नया कदम
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हर दिन लगभग 40 टन बायोमेडिकल वेस्ट का उत्पादन होता है, और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह मात्रा और भी बढ़ सकती है। इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने नई कॉमन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (CBWTFs) बनाने का निर्णय लिया है। इन नई सुविधाओं में प्रतिदिन 46 टन तक बायोमेडिकल वेस्ट का सुरक्षित निपटान करने की क्षमता होगी, जिससे शहर की वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था मजबूत होगी।
वर्तमान और प्रस्तावित बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट्स
वर्तमान में दिल्ली में दो मुख्य बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट हैं, जो सभी जिलों को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। लेकिन नई योजनाओं के तहत, तीन-तीन जिलों के क्लस्टर को कवर करने वाली नई फैसिलिटी स्थापित की जाएगी, जिससे वेस्ट प्रबंधन अधिक कुशल और प्रभावी बन सकेगा। सरकार का उद्देश्य है कि इन नई सुविधाओं से न केवल कवरेज में सुधार हो, बल्कि संचालन की दक्षता भी बढ़े। वर्तमान में, इन फैसिलिटीज़ का मुख्य कार्य बायोमेडिकल वेस्ट को ऑटोक्लेविंग और श्रेडिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से प्रोसेस करना है, ताकि सुरक्षित लैंडफिलिंग सुनिश्चित की जा सके।
आधुनिक तकनीक और विस्तृत योजना
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि सरकार पर्यावरण नियमों का पालन करते हुए अत्याधुनिक तकनीक से लैस ऑपरेटरों को लाने की योजना बना रही है। प्रस्तावित CBWTFs की क्षमता प्रतिदिन 46 टन है, जिसमें रोजाना लगभग 2300 किलोग्राम बायोमेडिकल वेस्ट को 20 घंटे के भीतर संसाधित किया जाएगा। इन नई फैसिलिटीज़ के लिए साइट लगभग आधे एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित है, और इनका उद्देश्य ऐसी तकनीकों का उपयोग करना है जो कानूनी और पर्यावरणीय मानकों का पालन करें। जल्द ही इन परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे, ताकि इन सुविधाओं का निर्माण तेजी से हो सके।









