मध्य प्रदेश विधानसभा में आवारा कुत्तों का मुद्दा गरमाया
मध्य प्रदेश की विधानसभा में मंगलवार को आवारा कुत्तों से जुड़ा विषय चर्चा का केंद्र बना रहा। जहां विपक्षी विधायकों ने इसे प्रशासन की विफलता बताया, वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव के ‘नस्ल खत्म करने’ के बयान ने इस बहस को नया मोड़ दे दिया।
भोपाल में आवारा कुत्तों का बढ़ता खतरा और सरकार की प्रतिक्रिया
कांग्रेस विधायक ने कहा कि भोपाल शहर में आवारा कुत्तों का आतंक अब केवल डर या असुविधा का कारण नहीं रहा, बल्कि यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक असफलता का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने बताया कि 2025 तक भोपाल में कुत्तों के काटने के मामलों की संख्या 19 हजार से अधिक पहुंच गई है।
वहीं भाजपा के पूर्व मंत्री और विधायक गोपाल भार्गव ने सवाल किया कि कुत्तों की आवश्यकता क्या है? उन्होंने कहा कि जब तक भारत में हर व्यक्ति के पास पर्याप्त भोजन नहीं है, तब तक इन जानवरों पर चर्चा क्यों की जाए? उनका सुझाव था कि इनकी नस्ल समाप्त कर दी जानी चाहिए।
शहरी प्रशासन का प्रयास और नसबंदी की चुनौतियां
शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने करीब आधे घंटे की चर्चा के बाद कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करेगी। उन्होंने ‘श्वान’ शब्द का प्रयोग करते हुए बताया कि इन जानवरों का प्रजनन दर बहुत अधिक है, और सरकार नसबंदी के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी का सामना कर रही है।
मंत्री ने कहा कि नसबंदी के लिए डॉक्टरों की कमी को देखते हुए, सरकार अन्य राज्यों से विशेषज्ञों को बुलाकर नसबंदी केंद्र स्थापित करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये जानवर भूखे न रहें, और उन्होंने कहा कि श्वान हमेशा हमारा साथी रहा है।
इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पलटवार किया कि आपके लिए कुत्ते महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इंसान नहीं। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने आश्वासन दिया कि अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की कोई कमी नहीं है और उसकी गुणवत्ता पर कोई सवाल नहीं उठता।











