पलवल के छायसा गांव में स्वास्थ्य संकट और मौतों का सिलसिला
पलवल के छायसा गांव में पिछले पंद्रह दिनों में बीस से अधिक लोगों की मौत ने पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में बुखार होने के बाद मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ती है और 48 घंटे के भीतर ही उसकी जान चली जाती है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पलवल स्वास्थ्य विभाग ने गांव में मेडिकल टीमों को तैनात कर जांच, उपचार और पानी के सैंपल लेने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और जांच प्रक्रिया
मौजूदा संकट के बीच स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार गांव में कैंप कर रही हैं। विभाग के अधिकारी बताते हैं कि अब तक सैकड़ों खून के नमूने लिए जा चुके हैं, जिनमें से 17 लोग हेपेटाइटिस संक्रमण से पीड़ित पाए गए हैं। इन मरीजों को आवश्यक दवाइयां दी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हेपेटाइटिस के पीछे दूषित पानी, संक्रमित सिरिंज का पुनः उपयोग और यौन संक्रमण जैसे कारण हो सकते हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बरतना जरूरी है।
स्थिति पर नियंत्रण और जांच का दायरा
प्रशासन का कहना है कि 11 फरवरी के बाद कोई नई मौत रिपोर्ट नहीं हुई है। पलवल के उपायुक्त हरिश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और चौबीसों घंटे निगरानी जारी है। अब तक करीब 1400 ब्लड सैंपल लिए गए हैं, जिनमें से 20 में हेपेटाइटिस-सी की पुष्टि हुई है। गांव में ओपीडी सेवाएं संचालित की जा रही हैं और पानी के सैंपल्स की भी जांच की जा रही है। साथ ही, कुछ झोलाछाप डॉक्टरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जहां एक ही सिरिंज के बार-बार इस्तेमाल की आशंका जताई गई है।









