कूनो नेशनल पार्क में बाघ की पहली बार पुष्टि
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध कूनो नेशनल पार्क में अब टाइगर की मौजूदगी का प्रमाण मिला है। यह पार्क पहले से ही चीता और अन्य जीवों के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल ही में पहली बार पर्यटकों ने यहां एक बाघ को देखा है। इससे पहले, पार्क में टाइगर के संकेत मिलते रहे थे, लेकिन अब इसकी वास्तविक उपस्थिति की पुष्टि हो गई है।
पार्क के अधिकारियों ने बताया कि यह बाघ संभवतः राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व का टी-132 हो सकता है, जो लगभग छह महीने पहले वहां से बाहर निकला था। इससे पहले भी पार्क में टाइगर के पदचिन्ह मिले थे, लेकिन अब पहली बार उसकी प्रत्यक्ष मौजूदगी का पता चला है।
पर्यटकों ने पहली बार देखा बाघ का दीदार
गुरुवार की सुबह टिकटोली गेट के पास जंगल में एक बाघ दिखाई दिया, जब पर्यटक निजी फ्लाइंग कैट सफारी पर निकले थे। उस समय बाघ आराम से बैठा हुआ था, लेकिन जैसे ही पर्यटकों की जिप्सी उसकी ओर बढ़ी, वह चल पड़ा और कुछ ही देर में जंगल के अंदर ओझल हो गया। यह घटना पार्क में बाघ की मौजूदगी का संकेत है और पर्यटकों के लिए एक अनूठा अनुभव रही।
कुल मिलाकर, यह पहली बार है जब कूनो में बाघ का स्पष्ट रूप से दीदार हुआ है, जो जैव विविधता के लिहाज से पार्क की महत्ता को और बढ़ाता है। अधिकारियों का मानना है कि यह बाघ संभवतः लंबे समय से पार्क में मौजूद था, लेकिन अब उसकी उपस्थिति का प्रमाण मिल गया है।
कूनो में बिग कैट की तीन प्रजातियां मौजूद
दुनियाभर में शेर, बाघ, जगुआर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता जैसी छह प्रमुख बिग कैट प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से अब कूनो नेशनल पार्क में तीन प्रजातियों का संरक्षण हो रहा है। पहले से ही यहां तेंदुओं की अच्छी संख्या है, और अब बाघ की मौजूदगी ने इस पार्क की जैव विविधता को और भी समृद्ध कर दिया है।
पार्क में चीता प्रोजेक्ट के तहत पिछले तीन वर्षों में कई प्रयास किए गए हैं, और अब बाघ की उपस्थिति से यह क्षेत्र और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। इससे न केवल पार्क की जैविक विविधता बढ़ेगी, बल्कि यह संरक्षण प्रयासों की सफलता का भी संकेत है।









