दिल्ली कैपिटल्स का WPL फाइनल का इतिहास और चुनौती
दिल्ली कैपिटल्स को महिला प्रीमियर लीग (WPL) के फाइनल में पहुंचने का अनुभव तो है, लेकिन यह टीम अब तक इस खिताबी मुकाबले को जीतने में असमर्थ रही है। लगातार चौथी बार यह टीम फाइनल में पहुंची है, लेकिन अभी तक का सफर उनके लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं रहा है। दिल्ली ने तीनों बार फाइनल गंवाए हैं, जिससे उनके खिलाड़ियों और समर्थकों में निराशा का माहौल बना हुआ है। इस बार वडोदरा के कोटाम्बी स्टेडियम में होने वाले मुकाबले में उनका सामना रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) से होगा। टीम का लक्ष्य सिर्फ ट्रॉफी जीतना नहीं है, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे इस ‘अभिशाप’ को तोड़ने का भी है।
2024 का फाइनल और दिल्ली की वापसी की उम्मीदें
अगर आप 2024 के WPL फाइनल को याद करें, तो दिल्ली कैपिटल्स का दिल टूटना भी ताजा होगा। उस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए शेफाली वर्मा और मेग लैनिंग की मजबूत साझेदारी के दम पर दिल्ली ने 7.1 ओवर में 64/1 का स्कोर बनाया था। लेकिन इसके बाद RCB ने शानदार वापसी की और दिल्ली को सिर्फ 113 रन पर ऑलआउट कर दिया। RCB ने आसानी से लक्ष्य हासिल कर खिताब अपने नाम किया। अब दो साल बाद, दिल्ली के पास उसी टीम से बदला लेने और इतिहास बदलने का सुनहरा मौका है। इस बार का फाइनल वडोदरा में ही खेला जाएगा, जहां टीम ने पहले भी जीत हासिल की है।
वडोदरा में फिर आमना-सामना और टॉप टीम का ‘श्राप’
इस सीजन दिल्ली को नवी मुंबई में RCB के हाथों हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन वडोदरा में खेले गए मुकाबले में उन्होंने वापसी कर RCB को हराया। अब फाइनल भी उसी मैदान पर होगा, जहां दिल्ली अपने खिताबी सपने को साकार करने की कोशिश कर रही है। WPL में अब तक टॉप पर रहने वाली टीम फाइनल नहीं जीत सकी है, और यह दिल्ली का सबसे बड़ा ‘श्राप’ माना जाता है। इस बार RCB ने लीग स्टेज में पहला स्थान हासिल किया है। स्मृति मंधाना की कप्तानी में टीम ने शुरुआती पांच मुकाबले जीतकर टॉप-3 में जगह बनाई और UP वॉरियर्स को हराकर टेबल टॉपर बनी। RCB को फाइनल से पहले एक हफ्ते का आराम मिला है, लेकिन कोच मेग लैनिंग ने माना है कि ज्यादा आराम कभी-कभी टीम की लय बिगाड़ सकता है। अब RCB का लक्ष्य है कि वह इस ‘कहावत’ को तोड़ते हुए ट्रॉफी पर कब्जा जमाए।











