इंदौर में अनिका की जिंदगी बचाने का संघर्ष
इंदौर की तीन वर्षीय अनिका शर्मा शायद यह नहीं जानती कि उसकी मुस्कान के पीछे उसके माता-पिता हर दिन एक कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं। यह लड़ाई समय, धन और आशा की जंग है, जिसमें वे अपनी इकलौती बेटी के जीवन को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अनिका को एक दुर्लभ बीमारी SMA टाइप-2 से पीड़ित है, जिसका इलाज संभव है, लेकिन उसकी कीमत है पूरे नौ करोड़ रुपये। केवल एक इंजेक्शन ही उसकी जिंदगी बदल सकता है और उसे सामान्य जीवन की ओर ले जा सकता है।
क्राउडफंडिंग और समाज का समर्थन
पिछले कुछ महीनों से अनिका के माता-पिता इस असंभव-सी लगने वाली रकम जुटाने के लिए क्राउडफंडिंग का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने हर संभव रास्ते पर प्रयास किया, चाहे वह नेता हों, उद्योगपति, व्यापारी, समाजसेवी या प्रसिद्ध हस्तियां। सिंगर पलक मुच्छल और अभिनेता सोनू सूद जैसे कलाकारों ने भी अनिका के लिए आवाज उठाई है। जब भारतीय क्रिकेट टीम जयपुर से इंदौर आई, तब अनिका की मां ने कप्तान रोहित शर्मा से भी अपनी बेटी की जिंदगी के लिए मदद की गुहार लगाई। इन प्रयासों के बावजूद अभी तक केवल लगभग 4.5 करोड़ रुपये ही जुट पाए हैं, जो मंजिल से अभी आधा ही है।
वजन और इलाज की अनिवार्यता
डॉक्टरों के अनुसार, अनिका का वजन साढ़े 13 किलो से पहले ही उसे यह जरूरी इंजेक्शन लगाना अनिवार्य है। उम्र के साथ वजन बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन माता-पिता के लिए यही प्रक्रिया एक डर का कारण बन गई है। वे हर दिन प्रार्थना करते हैं कि उनकी बेटी का वजन धीरे-धीरे बढ़े, ताकि उन्हें अधिक समय मिल सके। इस डर के कारण अनिका को वह भोजन नहीं मिल पा रहा है, जो हर बच्चे को मिलना चाहिए। उसे न रोटी, न चावल, बल्कि सिर्फ जूस, दूध और फल दिए जा रहे हैं ताकि उसका वजन नियंत्रित रहे। वर्तमान में उसका वजन लगभग साढ़े 10 किलो है, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि एक से डेढ़ महीने में वह साढ़े 13 किलो तक पहुंच सकती है। समय तेजी से गुजर रहा है, और अब एक अनूठा अभियान ‘बच्ची को बचाएंगे बच्चे’ अंतिम उम्मीद बनकर सामने आया है।











